फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

बेटी तुझे सलामः स्विट्जरलैंड छोड़ा, गरीबों से नाता जोड़ा

Wed, 04 Feb 2015 04:13 PM IST
सुमित सिंह श्यौराण /अमर उजाला, चंडीगढ़
विज्ञापन
विज्ञापन
जीवन में कुछ अलग करने की समीक्षा नंदा ने ठानी और लोगों के लिए एक प्रेरणा बन गईं। स्विट्जरलैंड में इंफोसिस सॉफ्टवेयर कंपनी की नौकरी छोड़ गरीब और बेसहारा बच्चों को पढ़ाने वाली समीक्षा नंदा ने सैकड़ों युवाओं के लिए मिसाल पेश की है।
विज्ञापन


कई सालों से स्विट्जरलैंड में लग्जरी जिंदगी और लाखों के पैकेज की नौकरी छोड़ नंदा ने गरीब बच्चों को शिक्षित करने का मिशन बनाया है।

दो महीने से समीक्षा नंदा सेक्टर-24 स्थित गवर्नमेंट मॉडल हाई स्कूल में थियेटर एज समाज सेवी संस्था के साथ मिलकर करीब 40 गरीब बच्चों को जिंदगी की नई राह दिखा रही हैं। उनके इस मिशन में समीक्षा के पति भी स्विट्जरलैंड से चंडीगढ़ शिफ्ट होने की तैयारी कर रहे हैं।

रोज लगती है ढाई घंटे की क्लास

‘अमर उजाला’ से खास बातचीत में समीक्षा ने बताया कि वह शुरू के दिनों में बच्चों की एक घंटे की क्लास लेती थी। पढ़ाई में बच्चों की लगन ने उन्हें ढाई घंटे की क्लास ( शाम 4 से 6.30) लेने को मजबूर कर दिया है।

उनका कहना है कि कई बार छुट्टी के बाद भी बच्चे क्लास से उन्हें जाने नहीं देते। समीक्षा ने बताया कि उन्हें इन बच्चों को पढ़ाने में सुकून और आनंद आता है।

इन्हीं बच्चों में उन्हें जिंदगी का असल मकसद दिखता है। पढ़ाई के साथ ही नंदा बच्चों को जिंदगी की जरूरी बातें भी बतातीं हैं। इन बच्चों के साथ ही उन्होंने अपना जन्मदिन मनाया। सभी मिलकर केक काटते हैं।
विज्ञापन

पेक से हासिल की इंजीनियरिंग डिग्री

सेक्टर-16 चंडीगढ़ में मां के साथ रहने वाली समीक्षा ने बताया कि उन्होंने स्कूली पढ़ाई सेक्टर-26 स्थित सेक्रेड हार्ट और इंजीनियरिंग (इलेक्ट्रानिक) की डिग्री पेक यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नालॉजी) से की।

आईआईएम कोलकाता से एमबीए के बाद उन्हें इंफोसिस में नौकरी मिल गई। समीक्षा करीब 10 साल पहले स्विट्जरलैंड में सेटल हो गईं थी। थियेटर ऐज के संयोजक जुल्फीकार खान ने बताया कि समीक्षा बच्चों को खास तरीके से पढ़ाती हैं। उन्होंने कहा कि काफी कम समय में बच्चों ने बहुत कुछ नई बातें सीखी हैं।   

मां से मिली प्रेरणा
समीक्षा नंदा 10 साल पहले स्विट्जरलैंड में बस गई थीं। उन्हें जिंदगी की सभी सुविधाएं तो मिलीं। लेकिन वह अपने शहर के गरीब बच्चों के लिए कुछ अलग करना चाहती थीं।

65 वर्षीय मां सुमन नंदा से उन्हें गरीब बच्चों की मदद करने की प्रेरणा मिली और उन्होंने बच्चों को पढ़ाना शुरू कर दिया। नंदा बताती हैं कि पिता की मौत के बाद मां ने खुद को संभाला और कैंसर पीड़ितों की मदद के लिए काम करना शुरू कर दिया। समीक्षा बताती हैं कि मां के जज्बे को देख उन्हें यह प्रेरणा मिली।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें