इंसानियत का का धर्म हर किसी के बस की बात नहीं। मिलिए ऐसी ही एक महिला है, जो जो इस धर्म को ऐसे निभा रही है कि लोग उसे गरीबों की मसीहा कहते हैं।
हम बात कर रहे हैं हरियाणा में अंबाला निवासी सुखविंदर कौर की। सुखविंदर कौर एक निजी स्कूल की प्रिंसीपल हैं। वे पिछले 20 सालों से गरीब बच्चों को फ्री एजूकेशन दे रही हैं। 1995 में सुखविंदर कौर ने गांवों के बच्चों को पढ़ाने का बीड़ा उठाया था। धीरे-धीरे यह कारवां बनता चल गया।
आज सुखविंदर के स्कूल में 72 गांवों के बच्चों को शिक्षा मिल रही है। सुखविंदर ने 1995 में किराये की बिल्डिंग से यह सफर शुरू किया था। आज स्कूल की अपनी बिल्डिंग है। 900 से ज्यादा बच्चे मुफ्त पढ़ रहे हैं।
सुखविंदर के जज्बे को देखते हुए कई लोग उनके इस कारवां से जुड़कर इंसानियत का धर्म निभा रहे हैं। सुखविंदर कौर के इस काम को देखते हुए इंटरनैशनल इंस्टीच्यूट और एजुकेशन एंड मैनेजमेंट की तरफ से उन्हें 7 सम्मान दिए जा चुके हैं।
सबसे पहले सुखविंदर कौर को राजीव गांधी अवार्ड से सम्मानित किया गया उसके बाद राष्ट्रीय एकता सम्मान, प्रियदर्शनी अवार्ड, बेस्ट सिटीजन ऑफ इंडिया, बेस्ट एजुकेशन व बेस्ट प्रिंसीपल, नैशनल महिला रत्न गोल्ड मैडल अवार्ड अब तक इन्हें मिल चुके हैं।
शिक्षिका सुखविंदर कौर अंबाला की इकलौती ऐसी टीचर हैं जिन्हें इस स्तर पर इतने अवार्ड मिले हों। सुखविंदर कौर ने बताया कि उन्हें यह सम्मान उनके स्टॉफ और परिवार की मदद के चलते मिले हैं।