ससुरालियों की सोच बदलने के लिए वो दोबारा से 'दंगल' उतर आई। कभी पति ने छुड़वा दिया था खेल, बेटी को मानने लगा था अभिशाप तो उसे ही छोड़ दिया। बहादुर बेटी के जज्बे को सलाम करें। पंजाब पुलिस में इंस्पेक्टर के पद पर कार्यरत जालंधर निवासी अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी गुरशरण कौर पानीपत में एक करोड़ी दंगल में हिस्सा लेने आईं हैं। अपने खेल से उन्होंने फाइनल में जगह बना ली है।
अपने बारे में बताते हुए गुरशरण ने बताया कि जब मैं खेल में मुकाम बना रही थी, तभी मेरी शादी हो गई। शादी के बाद मेरा खेलना बंद करा दिया गया, क्योंकि मेरी ससुराल वालों को मेरा खेलना पसंद नहीं था।
मैंने खेलने की कोशिश की तो मुझे प्रताड़ित किया गया। मेरी बेटी हुई तो उससे नफरत की जाने लगी। इसके बाद मुझसे बर्दाश्त नहीं हुआ। बेटियां किसी से कम नहीं होतीं, यह साबित करने और बेटियों को अभिशाप मानने वाले अपने ससुराल वालों की सोच को बदलने के लिए दोबारा से दंगल में उतरने का फैसला किया।