हेड इंजरी के चलते मौत से हार चुके पिता के अंगदान कराकर बेटे ने मिसाल पेश की। इससे दो लोगों को नई रोशनी मिली और दो को नई जिंदगी। सेक्टर-38 में रहने वाले 58 वर्षीय अरविंद को हेड इंजरी के बाद पीजीआई के ट्रॉमा सेंटर में एडमिट कराया गया था। डॉक्टरों ने उन्हें बचाने की काफी कोशिश की, लेकिन सफलता नहीं मिली और बाद में उन्हें ब्रेन डेड घोषित कर दिया।
इसके बाद जब पीजीआई के ऑर्गन ट्रांसप्लांट को-आर्डिनेटरों ने परिवार वालों से अंगदान के लिए बात की। बात करने पर परिजन ऑर्गन डोनेशन के लिए तैयार हो गए। इसके बाद पीजीआई के डॉक्टरों ने किडनी और कॉर्निया को सफलता पूर्वक निकाल लिया। किडनी दो अलग-अलग मरीजों को ट्रांसप्लांट कर दी गई है, जबकि कॉर्निया को अभी संभाल कर रख दिया।
इस मौके पर अरविंद मलिक के बेटे और मर्चेंट नेवी में इंजीनियर जतिन मलिक ने बताया कि उनके पिता दूसरों की मदद के लिए हर वक्त तैयार रहते थे। दूसरों की मदद कर उनके चेहरे पर खुशी आती थी। अपने पिता को बचाने के लिए उन्होंने कोई कसर नहीं छोड़ी। उनका इस तरह से जल्दी जाना यकीन नहीं होता। मरकर भी वे जिंदा रहे, इसलिए ऑर्गन डोनेशन का फैसला लिया है।