हरियाणा की सहकारी चीनी मिलों को घाटे से उबारने के लिए प्रदेश सरकार एक नई पहल करने जा रही है। इन सहकारी चीनी मिलों मैं तैयार होने वाली चीनी को अब थोक के साथ-साथ रिटेल पैकिंग के साथ में भी बेचा जाएगा। इसके लिए 1 किलो और 5 किलो चीनी के पैक बना कर उन्हें वीटा और हैफेड के आउटलेट्स पर बिक्री हेतु रखा जाएगा।
अभी तक वीटा और हैफेड दोनों अपने आउटलेट्स पर अपने-अपने उत्पादों की ही बिक्री करते हैं। मगर अब वहां सहकारी मिलों में तैयार पैक्ड चीनी भी बिकेगी। दरअसल, यह योजना सहकारी चीनी मिलों को घाटे से उबारने के लिहाज से एक और पहल स्वरूप की जा रही है। हरियाणा में कुल 14 चीनी मिलें हैं। जिनमें से 10 सहकारी विभाग की , 1 हैफेड की और 3 प्राइवेट चीनी मिलें शामिल हैं।
किसान अपना गन्ना इन मिलों में लेकर आता है और यहां गन्ने की पेराई के बाद चीनी तैयार की जाती है। जो विभिन्न एजेंसियों के माध्यम से थोक में बेची जाती है। दरअसल, चीनी के कंट्रोल रेट की वजह से इसका दाम अमूमन ज्यादा नहीं बढ़ता। मगर समय-समय पर किसानों के गन्ने का रेट जरूर बढ़ जाता है। ऐसे में ये चीनी मिलें करोड़ों रुपये के घाटे में चली जाती हैं। आज भी हरियाणा की चीनी मिलें करोड़ों रुपये के घाटे में हैं।