प्रशासन ने कांट्रैक्ट कर्मचारियों का वेतन बढ़ाकर रक्षाबंधन पर उन्हें बड़ा तोहफा दिया है। वेतन में 1100 रुपये से लेकर 2200 रुपये तक बढ़ोतरी की है। हालांकि इससे कर्मचारी खुश नहीं है। उनका कहना है कि जिस तेजी से महंगाई बढ़ी है, उसके मुकाबले यह राशि काफी कम है।
यूनियन की मांग है कि न्यूनतम वेतन कम से कम 15 हजार होना चाहिए। इसके लिए देश की सभी ट्रेड यूनियन दो सितंबर को आंदोलन कर रही हैं। चंडीगढ़ में ये कर्मी पीजीआई, नगर निगम, पीयू, जीएमसीएच-32, जीएमएसएच-16 सहित अन्य जगहों पर सेवाएं दे रहे हैं।
पीजीआई में कार्यरत अस्पताल अटेंडेंट और सेनेटरी अटेंडेंट के वेतन में प्रति महीना 1100 रुपये की बढ़ोतरी हुई है। जबकि सुपरवाइजर की सैलरी में 2200 रुपये बढ़ोतरी हुई है। सबसे ज्यादा मार उस वर्ग पर पड़ी है जो गरीबी से संघर्ष कर रहा है। इसमें खासतौर पर अस्पताल अटेंडेंट, वार्ड सरवेंट, माली, स्वीपर और चौकीदार शामिल हैं।
ऑल इंडिया सेंट्रल काउंसिल ऑफ ट्रेड यूनियन के प्रेसिडेंट कंवलजीत का कहना है कि हड़ताल रोकने के लिए प्रशासन कर्मियों पर डोरे डाल रहा है। पीजीआई इंप्लाइज यूनियन के महासचिव जसवीर सिंह ने बताया कि अच्छी बात है कि कर्मचारियों का कुछ वेतन बढ़ा है। लेकिन यूनियन इससे संतुष्ट नहीं है। हम एकसमान काम और वेतन लागू करने के लिए प्रयास कर रहे हैं। इस बारे में जल्द ही पीजीआई प्रशासन से बात करेंगे।