फिल्मी 'सुल्तान के दांव की तरह ही पहलवान साक्षी मलिक का भी एक अपना दांव है, विरोधियों के पास इसका कोई जवाब नहीं। दांव का नाम है ‘दोहरी पट’। वह रिंग में तुरंत अटैक करती हैं और विरोधी के दांव को काटने में माहिर हैं। इसी का परिणाम है कि आज साक्षी का नाम देश की हर जुबां पर है। साक्षी की यह खासियत सांझा की है उनके कोच ईश्वर सिंह दहिया ने।
सिसाना निवासी कोच ईश्वर ने बताया कि साक्षी को कुश्ती का जुनून है, वह हर पल अपने दांव पेच का ही अभ्यास करती रहती है। वह समय की बेहद पाबंद है। 5 अप्रैल 1994 को खेल विभाग से सेवानिवृत्ति के बाद छोटूराम स्टेडियम में प्रशिक्षण देना शुरू किया। यहां 100 से अधिक राष्ट्रीय खिलाड़ी हैं। वर्ष 2004 में मेरे पास साक्षी आई तो उस समय भी उसके अंदर कुश्ती को लेकर पूरा जुनून था।
साक्षी की इच्छा थी कि भले ही उसके मृत शरीर को मेडल पहनाया जाए, लेकिन मेडल हर हाल में चाहिए। इसी का परिणाम था कि वह अंतिम सेकेंड तक प्रतिद्वंद्वी से लड़ी और अंतिम क्षणों में बाजी पलट दी। इसी लगन के चलते साक्षी ने सबसे कम समय में परिणाम दिखाया है। अगले ओलंपिक 2020 में उसका गोल्ड मेडल निश्चित है। वे अभी साक्षी को मिले मेडल से संतुष्ट नहीं हैं, क्योंकि उसमें गोल्ड जीतने की क्षमता है।