देशभर से पंजाब यूनिवर्सिटी की सैफ और सीआईएएल लैब में आने वाले रिसर्च के सैंपल अब पेंडिंग नहीं रहेंगे। क्योंकि पीयू इसके लिए सैफ और सीआईएएल लैब का विस्तार करने जा रहा है। इस पर 122 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। पीयू ने अभी यह प्रस्ताव तैयार कर केंद्र सरकार को भेजा है। उम्मीद है कि नए साल में यह प्रस्ताव पास होगा और इस पर काम भी शुरू हो जाएगा।
सैफ लैब में रसायन आदि की जांच होती है। यह काम रिसर्च स्टूडेंट्स और इंडस्ट्री करवाती है। एक साल में पीयू की इस लैब में 13 हजार से अधिक सैंपल जांच के लिए आते हैं, जिनमें 60 फीसदी नमूने दूसरे राज्यों से आते हैं। इनकी रिसर्च के लिए मैनपावर और उपकरण पर्याप्त नहीं हैं। इसमें समय अधिक लगता है और कई प्रकार के सैंपलों की जांच यहां नहीं हो पाती है। इसको ध्यान में रखकर पीयू ने इस लैब के विस्तार की योजना बनाई है और इस पर मार्च से काम शुरू हो जाएगा।
इन सैंपलों की होती है जांच
सैफ और सीआईएएल लैब में फेसिम, एनएमआर, एलसीएमएस, जीसीएमएस, एक्सआरडी, एक्सआरएफ, एसएएक्सएस आदि की जांच होती है। इन सैंपलों की जांच के लिए शुल्क निर्धारित है। इस समय इन सैंपलोें की जांच कर पीयू करीब सवा करोड़ रुपये कमा रहा है। जब 122 करोड़ रुपये से लैब का विस्तार होगा तो फिर पीयू की यही कमाई तकरीबन चार करोड़ रुपये पहुंच जाएगी।
पीयू में सैफ लैब के विस्तार के लिए 122 करोड़ रुपये का प्रोजेक्ट वीसी के माध्यम से सरकार को भेजा गया है। जब प्रस्ताव मंजूर हो जाएगा तो उसके बाद उस पर काम होगा।
- डॉ. एसके मेहता, इंचार्ज सैफ लैब
ये होंगी नई सुविधाएं, खरीदे जाएंगे उपकरण
- इस लैब में एडवांस एनालिटिकल इंस्ट्रूमेंट्स होंगे। इसमें एक्स-रे फोटोलेक्ट्रोन स्पेक्ट्रोस्कॉपी, वाइब्रेटिंग सैंपल मैगनेटोमीटर, बायो एएफएम, आईआर एमेजिंग, एएफएम विद रमन, एचपीटीएलसी, जैनेटिक एनालाइजर, पीसीआर वर्क स्टेशन।
- फूड एंड सॉइल टेस्टिंग फैसिलिटी के लिए मल्टी कलेक्टर आईसीपी एमएस, एचआरजीसीएमएस, यूपीएलसी, इसोटोप रेटियो आदि उपकरण खरीदे जाएंगे।
- प्रोटोटाइप मैन्यूफैक्चरिंग एंड डिवाइस फैब्रिकेशन फैसिलिटी के लिए मोलिक्यूलर बीम ईपीटेक्सी, इलेक्ट्रोन बीम लीथोग्राफी, थ्री-डी प्रिंटर आदि उपकरण खरीदे जाएंगे।
- एनर्जी रिसॉर्स रिसर्च शुरू होगा और आरडीई सिस्टम भी विकसित किया जाएगा।
दस साल के लिए रखे जाएंगे तकनीशियन
इस प्रोजेक्ट के जरिये मैनपावर भी बढ़ाई जाएगी। इसमें जांच करने के लिए 30 से अधिक तकनीशियन रखे जाएंगे और कुछ नॉन तकनीशियन स्टाफ भी रखा जाएगा। इनकी सेलरी का प्रबंध भी प्रोजेक्ट के जरिये ही होगा।