एक्सीडेंट या किसी कारणवश आंख में कांच का टुकड़ा चले जाने का पीजीआई ने सफलतापूर्वक व सस्ता इलाज ढूढ़ निकाला है। इलाज के दौरान पेशेंट की आंख की रोशनी को कोई नुकसान नहीं पहुंचा। यह तकनीक पीजीआई के एडवांस आई सेंटर के एसोसिएट प्रोफेसर डा. रमनदीप सिंह ने विकसित की है।
उन्होंने इस तकनीक से 14 पेशेंट का इलाज किया है। कांच का टुकड़ा घुसने से सभी पेशेंट की रोशनी जाने का खतरा था, लेकिन डाक्टर रमनदीप व उनकी टीम ने बहुत ही सावधानीपूर्वक इस तकनीक से इलाज किया और उनकी रोशनी भी बरकरार रही।
डा. रमनदीप ने इस तकनीक का नाम 23-गेज विंट्रेक्टोमी रखा है। डाक्टर का कहना है कि यह तकनीक मरीज और डाक्टरों दोनों को सहूलियत देती है।
एक हजार रुपये में इलाज
डा. रमनदीप ने बताया कि पहले इंट्राओकुलर फोरसेप्स तकनीक से इलाज होता था और इसके लिए मरीज को 20 हजार रुपये खर्च करने पड़ते थे। नई तकनीक से इलाज पर खर्च सिर्फ एक हजार रुपये आता है।
इसमें कोई भी दूसरा जोखिम नहीं होता। इस तकनीक में कॉर्निया के साथ लगती काली रेखा (लिंबस) से साफ्ट निडिल डाली जाती है। इसे हाल ही में इंडियन जरनल आफ आप्थलमोलॉजी में प्रकाशित किया गया है।
लेबर पेन के लिए निकाली हीट थैरेपी
पीजीआई की नाइन की लेक्चर सुखविंदर कौर ने फस्ट स्टेज के लेबर पेन के लिए एक नई तकनीक विकसित की है। उन्होंने एक हीट थैरेपी निकाली है। इसका प्रयोग करने से लेबर पेन में काफी राहत मिलती है।
उन्होंने बताया कि यह स्टडी साल 2012 में की थी। हीट पैड को सिर्फ कुछ मिनट के लिए गरम किया जाता और उसके बाद लेबर पेन में राहत मिल जाती है।