जो गलती को सुधारे उसे इंसान कहते हैं। गलती पर गलती करे उसे नादान कहते हैं। ईर्ष्या में गलती करे उसे शैतान कहते हैं। गलतियों की सीमा पार करे उसे पाकिस्तान कहते हैं और उसे इस पर भी माफ कर दे, उसे हिंदुस्तान कहते हैं। सम्मेलन में पहुंचे जैन मुनि तरुण सागर महाराज ने गलतियां करने वालों पर तंज कसा। सामाजिक समरसता मंच पर जुटे देशभर के संतों को लेकर भी उन्होंने तंज कस दिया।
कहा कि एक साथ इतने संतों को बैठाना बंदरों को पंगत में बैठाकर भोजन कराने जैसा है। इसलिए इतने संत सद्भावना का संदेश देने के लिए जुटे हैं तो सभी को सद्भावना की राह पर चलना चाहिए। कड़वे प्रवचनों के लिए पहचाने जाने वाले जैन मुनि ने सम्मेलन में भी जमकर शब्द बाण छोड़े। उन्होंने कहा कि भला करने वाले के साथ भला करने वाला इंसान होता है। भला करने वाले के साथ बुरा करने वाला शैतान होता है और बुरा करने वाले के साथ भला करने वाला भगवान होता है।
केवल अपना भला सोचने वाले दुर्योधन की श्रेणी में आते हैं, जो पापात्मा होती है। केवल अपनों का भला करने वाले युद्धिष्ठर की श्रेणी में आते हैं जो पुण्यात्मा होती है। सभी का भला करने वाले भगवान श्रीकृष्ण की श्रेणी में आते हैं जो परमात्मा होते हैं। क्योंकि दूसरों का भला करने पर हमेशा खुद को उसका उल्टा लाभ मिलता है। उन्होंने कहा कि रामायण की सीता और महाभारत की गीता ही असली संस्कृति है। लेकिन भारत का भला महाभारत से नहीं, बल्कि रामायण से होगा। महाभारत भाई-भाई के बीच स्वार्थ है तो रामायण भाई-भाई के बीच त्याग की कहानी है।