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शिअद की मांगः हरियाणा-राजस्थान से वसूली जाए रॉयल्टी, कैप्टन बोले- पानी का पैसा नहीं ले सकते

Thu, 23 Jan 2020 09:44 PM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
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पानी के मुद्दे पर सर्वदलीय बैठक। - फोटो : ANI
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जल संकट को लेकर पंजाब सरकार ने सभी दलों की एक महत्वपूर्ण बैठक गुरुवार को बुलाई। अब इस मुद्दे पर पंजाब में सियासत भी तेज हो गई है। अकाली दल ने पंजाब सरकार से मांग की है कि वे राजस्थान और हरियाणा से पानी की रॉयल्टी वसूले। इस पर पंजाब के सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कहा कि राजस्थान से पंजाब पानी की रॉयल्टी नहीं वसूल कर सकता है।

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शिरोमणि अकाली दल ने कहा है कि नदियों के पानी के मामले में 'राइपेरियन सिद्धांतों' के अलावा कुछ भी स्वीकार नहीं किया जाएगा। इसके साथ ही पंजाब टर्मिनेशन ऑफ एग्रीमेंट्स एक्ट 2004 से क्लॉज पांच हटाया जाना चाहिए। शिअद के बलविंदर सिंह भूंदड़, प्रो. प्रेम सिंह चंदूमाजरा और महेश इंदर गरेवाल सीएम की सर्वदलीय बैठक में शामिल हुए। 

मीटिंग के बाद प्रो. चंदूमाजरा ने कहा कि पानी पर पंजाब के हक के लिए पार्टी ने मोर्चे लगाए हैं। पंजाब के नॉन राइपेरियन राज्यों राजस्थान और हरियाणा का सूबे की नदियों के पानी पर कोई हक नहीं है। दुर्भाग्य की बात है कि इस मुद्दे पर पहले कांग्रेस ने शिअद के स्टैंड का विरोध किया था। लेकिन आज सभी दल शिअद के स्टैंड का समर्थन कर रहे हैं। 

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उन्होंने कहा कि यह पार्टी की सफलता है कि सीएम इस मुद्दे पर विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने को राजी हो गए हैं। जिसमें यह प्रस्ताव पास किया जाए कि राइपेरियन सिद्धांतों के आधार पर ही पानी का बंटवारा होगा। शिअद ने यह भी मांग की है कि सभी दल टर्मिनेशन ऑफ एग्रीमेंट्स एक्ट 2004 से क्लॉज 5 हटाने का समर्थन करें। 

उन्होंने कहा कि दुख की बात है कि आम आदमी पार्टी ने इसका समर्थन नहीं किया। विशेष सत्र में इस पर भी विचार किया जाएगा। सीएम से कहा गया कि राजस्थान और हरियाणा से पानी की रॉयल्टी वसूली जाए। क्योंकि किसी संवैधानिक और कानूनी अधिकार के बिना वे इसका इस्तेमाल कर रहे हैं।

राजस्थान से पानी का पैसा नहीं ले सकता पंजाब: कैप्टन
वहीं पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कहा है कि पंजाब के पास सरप्लस पानी नहीं है। हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा द्वारा पानी के मुद्दे पर दिए बयान पर कैप्टन ने कहा कि उस समय हालात अलग थे और अब हालात अलग हैं। पंजाब में पानी का स्तर लगातार घटता जा रहा है। राजस्थान से पानी के पैसे नहीं लेने संबंधी सवाल पर मुख्यमंत्री ने कहा कि 1967 में गुलजारी लाल नंदा द्वारा किए एग्रीमेंट के तहत पानी की कीमत वसूल ही नहीं की जा सकती। उन्होंने कहा कि उस समय किए एग्रीमेंट में कहीं भी यह नहीं लिखा गया था कि पानी की कीमत वसूली जाएगी। 
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भूजल स्तर को लेकर कदम उठाए पंजाब सरकार

उधर, आम आदमी पार्टी ने भूजल के गिरते स्तर और प्रदूषण का मुद्दा उठाया। पार्टी ने कहा कि यह तो राज्य सरकार के हाथ में है। इसके लिए ठोस कदम उठाए जाएं। बैठक में नेता प्रतिपक्ष हरपाल चीमा, अमन अरोड़ा और कुलतार संधवां शामिल हुए। चीमा ने कहा कि पानी को लूटने और गंदा करने के लिए जिम्मेदार राजनीतिक दलों को पंजाबियों से माफी मांगनी चाहिए। 

पानी को जहरीला करने के लिए प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड सबसे ज्यादा जिम्मेदार है। जोकि भ्रष्टाचार का अड्डा है और सरकारी खजाने के लिए सफेद हाथी है। हर इंडस्ट्री, कॉलेज या बड़ संस्थानों में अन-ट्रीटेड पानी सीधे धरती में डाला जा रहा है। जिसके गंभीर नतीजे होंगे। ज्यादातर जगह ट्रीटमेंट प्लांट ही नहीं है लेकिन प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड इस पर कुछ नहीं कर रहा है। 

हाल ही में खरड़ के पास गंदे पानी के चलते काफी फसल खराब हो गई। भूजल स्तर के गिरने और प्रदूषण के मुद्दे पर सभी पार्टियों को मिल कर लड़ाई लड़नी होगी। पुडा, गमाडा जैसी विकास प्रधिकरण को यह यकीनी बनाना चाहिए कि हर नई कॉलोनी में ट्रीटमेंट प्लांट हो। उन्होंने कहा कि गिरते भूजल स्तर को रोकने के लिए सरकार को फसली विविधता पर ध्यान देना चाहिए। अगर पूरे पंजाब में एक साथ संभव न हो तो अलग-अलग जोन बनाने चाहिए। गेहूं और धान जैसी परंपरागत फसलों के बजाय कपास, मक्की, बासमती और अन्य फसलों को प्रोत्साहन देना चाहिए। 
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