कहा, भगवंत मान ने पंजाब के मुद्दे हल करने का मौका गंवाया
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। शिरोमणी अकाली दल (शिअद) ने पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान की ओर से नीति आयोग की बैठक का बहिष्कार किए जाने की निंदा करते हुए कहा है कि इससे पंजाबियों को नुकसान होगा।
अकाली दल के प्रवक्ता चरणजीत सिंह बराड़ ने शनिवार को पंजाबियों के बजाय दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवपाल के राजनीतिक हितों को तरजीह देने के लिए मुख्यमंत्री की आलोचना करते हुए कहा कि पंजाब सरकार ने शिक्षा, स्वास्थ्य, कौशल विकास और बुनियादी ढांचे जैसे प्रमुख मुद्दों पर विचार-विमर्श का अवसर खो दिया है। उन्होंने कहा कि आप सरकार का दावा है कि ये मुद्दे उसके कार्य मॉडल का आधार हैं, लेकिन उन्होंने नीति आयोग की बैठक का बहिष्कार करने का विकल्प चुना, जिसमें इन मुद्दों पर विस्तार से चर्चा होने जा रही है।
बराड़ ने कहा कि नीति आयोग की आठवीं गवर्निंग काउंसिल मीटिंग में देश के विकास के लिए पूरे विस्तार से चर्चा की जाएगी। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री को इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए आवश्यक फंड मांगने के लिए बैठक में भाग लेना चाहिए था। राज्य के खिलाफ भेदभाव के विरोध में बैठक का बहिष्कार करने के आप सरकार के दावों पर आपत्ति जताते हुए बराड़ ने कहा कि नीति आयोग की बैठक से दूर रहने के बजाय राज्य के सामने आने वाले सभी मुद्दों का समाधान करने के लिए विरोध दर्ज किया जाना चाहिए था।
अकाली नेता ने कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत मान सक्रिय दृष्टिकोण अपनाने में नाकाम रहे। जिस कारण पहले ही राज्य और इसकी अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचा है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने अब तक 3600 करोड़ रुपये के बकाया ग्रामीण विकास कोष (आरडीएफ) जारी करने का मुद्दा प्रधानमंत्री के समक्ष नहीं उठाया और न ही किसानों के लिए पर्याप्त मुआवजे की मांग की। उन्होंने कहा कि पंजाब ने इन सभी मुद्दों को हल करने का अवसर खो दिया है।