जनहित याचिका के माध्यम से उठाया गया मुद्दा, जवाब के लिए 15 नवंबर तक की मोहलत
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। खरड़ में निजी अस्पतालों की ओर से लिंग जांच के मामले में दाखिल की गई जनहित याचिका पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने प्रदेश भर के अस्पतालों व अल्ट्रासाउंड केंद्रों को लेकर पंजाब सरकार से जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने इसके लिए सरकार को 15 नवंबर तक मोहलत दी है।
मामले में याचिका दाखिल करते हुए एक एनजीओ नेशनल एंटी क्राइम एंड ह्यूमन राइट प्रोटेक्शन ऑफ इंडिया ने बताया था कि खरड़ के एसके अस्पताल में गर्भ में लिंग जांच का कार्य किया जा रहा है। मामले में शिकायत के आधार पर एक मेडिकल टीम गठित की गई थी, जिसने अस्पताल का निरीक्षण किया। हैरत की बात है कि अस्पताल प्रबंधन ने उस मेडिकल टीम के लिए बंधक जैसा माहौल बना दिया और उन्हें सीसीटीवी और डीवीआर देखने नहीं दी। इसके बाद पुलिस के सहयोग से टीम अस्पताल से बाहर निकली थी और जांच पूरी नहीं हो पाई। टीम ने इसकी शिकायत पुलिस और एसडीएम को दी, परंतु उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई। बाद में याची को पता चला कि अस्पताल पर पहले भी इसी तरह का एक मामला दर्ज है, लेकिन उसमें भी कोई कार्रवाई नहीं हुई। एक अल्ट्रासाउंड सेंटर अंबाला में भी चलाया जा रहा है।याचिकाकर्ता ने कहा कि इस प्रकार दर्ज एफआईआर को लंबे समय तक लंबित रखा जाता है, जिसका फायदा ऐसे अस्पताल उठाते हैं और अपने नाम में मामूली परिवर्तन कर लिंग जांच का कार्य बदस्तूर जारी रखते हैं। ऐसे ही सेंटरों और अस्पतालों के कारण लिंग अनुपात में बड़ी तेजी से गिरावट आई है। कई स्थानों पर तो यह अनुपात 1 हजार लड़कों के पीछे 900 से भी कम लड़कियों तक रह गया है। याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट से अपील की कि वे इस मामले में दखल दें और उचित निर्देश जारी करें। याचिका पर हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार को प्रदेश भर में मौजूद ऐसे सेंटरों को लेकर जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है।