सिखों के सबसे पावन व सर्वोच्च पांच तख्तों में से दूसरे तख्त पर शनिवार को फिर से बेअदबी हो गई। तीन माह में यह तीसरी बड़ी बेअदबी है, जिसने देश-विदेश में बसी सिख संगत को झकझोर कर रख दिया है। हर बार एक ही बात उठती है साजिश है, साजिश है जांच होगी, लेकिन नतीजा शून्य ही मिला है।
पंजाब में बेअदबी के मामले पहले भी आते रहे हैं, यह दूसरी बार है कि जब किसी ने पांच तख्तों में से एक में जाकर ऐसा काम किया हो। श्री अकाल तख्त (अमृतसर), दमदमा साहिब, पटना साहिब और हुजूर साहिब (नांदेड़) व केशगढ़ साहब सिख पंथ में पंज तख्त के नाम से प्रसिद्ध हैं।
13 सितंबर को भी हुई थी बेअदबी
13 सितंबर को सुबह करीब साढ़े चार बजे एक शख्स दरबार साहिब में आया था। उस समय केसगढ़ साहिब में पावन स्वरूपों का प्रकाश किया जाना था। तभी वह बीड़ी पीने लगा। धुआं होने पर उसने बीड़ी उस जगह पर फेंक दी, जहां ग्रंथी बैठते हैं। सेवादारों ने उसे टोका तो उसने उनके ऊपर धुआं भी छोड़ा। इसके बाद उसे नीचे ले जाया गया। कुछ लोगों ने उसकी पिटाई भी कर दी। सिखों में बीड़ी, सिगरेट पीने और तंबाकू खाने की इजाजत नहीं है।
जांच में पुलिस के हाथ खाली है, सिर्फ सामने आया कि आरोपी का नाम परमजीत सिंह (38) है। परमजीत मानसिक रूप से बीमार है। उसका पिछले एक साल से मानसिक बीमारी का इलाज चल रहा है। एसीजीपी की प्रधान बीबी जागीर कौर ने आरोप लगाया था कि यह एजेंसियों की साजिश है। इसकी जांच होनी चाहिए, लेकिन आज तक जांच में कुछ नहीं निकला। 15 अक्तूबर को भी सिंघू बार्डर पर निहंग सिंहों ने बेअदबी की हत्या करने के आरोपी लखबीर सिंह को हथियारों से काट डाला था।
सिंघु बार्डर पर लखबीर हत्याकांड के बाद कई सवाल ऐसे उठे, जिससे साजिश के संकेत मिल रहे थे। संधू साहब कौन थे जो लखबीर से बात करता था, आज तक एजेंसियां खोज नहीं पाई है। पंजाब पुलिस के सजायाफ्ता इंस्पेक्टर गुरमीत सिंह पिंकी का क्या कनेक्शन था, जिसकी फोटो केंद्रीय मंत्री व निहंग सिंहों के साथ वायरल हुई थी।
साल 2001 में गुरमीत पिंकी पर लुधियाना में अवतार सिंह उर्फ गोला की हत्या का आरोप लगा। जिस मामले में अक्तूबर 2006 में उसे उम्रकैद हुई और पुलिस से निकाल दिया गया। करीब आठ साल सजा काटने के बाद अच्छे व्यवहार की बात कह सरकार ने उसे रिहा कर दिया। वर्ष 2014 में रिहा होने के बाद मई 2015 में गुरमीत को फिर से पंजाब पुलिस में नियुक्त करने के निर्देश दिए गए।
हालांकि विवाद होने पर इस फैसले को चार दिन बाद ही रद्द करना पड़ा। गुरमीत पिंकी के विरोधी उस पर आतंकी संगठन बब्बर खालसा से संबंध होने के आरोप लगाते रहे। बब्बर खालसा के आंतकी फिर पुलिस के मुखबिर, पुलिस के इंस्पेक्टर गुरमीत सिंह पिंकी की भूमिका पर आज भी एजेंसियां खामोश हैं।
लखबीर सिंह के पास एक रुपया नहीं था, वह दिल्ली कैसे पहुंचा ? उसको निहंग सिंह का बाना किसने दिया ? इसके सवाल अभी भी खड़े हैं। हर बार सवाल खड़ा होता है कि साजिश है साजिश है लेकिन जांच में कुछ नहीं निकलता।