उन्होंने बताया कि 23 जनवरी को विकास एवं पंचायत विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव की अध्यक्षता में अधिकारियों व यूनियन प्रतिनिधियों के बीच हुई वार्ता में वेतन बढ़ोतरी, सालाना वेतन में तीन प्रतिशत की बढ़ोतरी, मासिक वर्दी धुलाई भत्ता देने और काम के औजारों का भत्ता देने की सहमति बन चुकी है लेकिन 17 अप्रैल से ये फाइल मुख्यमंत्री की टेबल पर मंजूरी के लिए पड़ी हैं। ऐसे में वे मांगों को लेकर 10 अक्तूबर से तीन दिवसीय हड़ताल पर जाने पर मजबूर हैं।
ये हैं प्रमुख मांगें
- विधानसभा में नीति बनाकर सफाई कर्मियों को पक्का किया जाए।
- सभी ग्रामीण सफाई कर्मियों को बीडीपीओ के पे-रोल पर लिया जाए।
- हरियाणा रोजगार कौशल निगम को भंग किया जाए और सफाई कर्मियों को पक्का किया जाए।
- सभी सफाई कर्मियों के लिए 26,000 रुपये मासिक न्यूनतम वेतन लागू किया जाए।
- 2000 की बजाय 400 की आबादी पर एक कर्मचारी की स्थाई नियुक्ति की जाए।
- बराबर वेतन, वर्दी भत्ता, पीएफ और ईएसआई दिया जाए।
- 500 रुपये मासिक काम के औजारों का भत्ता दिया जाए।