फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

अधिकारियों की अनदेखी: मरीजों की सुविधाओं पर पूरा बजट भी खर्च नहीं, NHM के तहत मिले थे 18 करोड़

Thu, 18 Sep 2025 03:02 PM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत इस तरह का मामला सामने आया है। जिसमें सरकार की तरफ से अलग-अलग यूनिट में दिए गए करोड़ों रुपए में से आधी रकम भी विभाग खर्च नहीं कर पाया है। सेंट्रल ऑडिट टीम ने इस पर आपत्ति जताई है।
विज्ञापन
स्वास्थ्य - फोटो : फ्रीपिक
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

चंडीगढ़ के स्वास्थ्य विभाग की गंभीर लापरवाही ने मरीजों को मिलने वाली सुविधाओं को खतरे में डाल दिया है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के तहत बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों की स्वास्थ्य सेवाओं के लिए आवंटित करोड़ों रुपये का बजट अधिकारियों की अनदेखी के चलते खर्च नहीं हो पा रहा है।

विज्ञापन


केंद्रीय ऑडिट टीम की रिपोर्ट के अनुसार, साल 2022-23 में विभाग को विभिन्न 20 योजनाओं के लिए आवंटित 18.36 करोड़ रुपये में से सिर्फ 6.18 करोड़ रुपये का ही इस्तेमाल किया गया। यह आवंटित बजट का मात्र एक-तिहाई हिस्सा है। कई योजनाओं में तो एक भी रुपया खर्च नहीं हुआ।

रिपोर्ट बताती है कि अधिकतर स्वास्थ्य योजनाओं में खर्च बहुत कम रहा। 12 योजनाओं में एक से 20% के बीच खर्च हुआ। चार 4 योजनाओं में 21 से 40% के बीच खर्च हुआ। वहीं, सिर्फ 3 योजनाओं में ही 41% से 70% तक खर्च हो पाया। यह स्थिति खासकर तब चिंताजनक है जब मातृत्व स्वास्थ्य, बाल स्वास्थ्य और टीकाकरण जैसी महत्वपूर्ण योजनाओं के लिए भी आवंटित बजट का बहुत कम हिस्सा इस्तेमाल हुआ।
विज्ञापन


स्टेट प्रोग्राम इंप्लीमेंटेशन प्लान को एग्जीक्यूटिव कमिटी तैयार करती है। जिसे स्टेट हेल्थ सोसाइटी और स्टेट गवर्नमेंट स्वीकृति प्रदान करती है। उसके अंतर्गत मरीजों की संख्या और सुविधाओं का आकलन करते हुए सरकार से बजट के डिमांड की जाती है। ऐसे में विभाग बजट मांगने में तो काफी आगे है। लेकिन उसे खर्च करने में अधिकारियों को जरा भी रुचि नहीं है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के रिकॉर्ड की जांच के दौरान पाया कि 2022-23 में मिले हुए बजट का सिर्फ एक तिहाई हिस्सा खर्च किया गया है।

18 करोड़ में से सिर्फ 6 करोड़ खर्च

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत स्वास्थ्य विभाग को 2022- 23 में 20 अलग-अलग योजनाओं के लिए 18 करोड़ 35 लाख 82000 स्वीकृत किए गए थे। जिसके अंतर्गत सिर्फ 6 करोड़ 18 लाख 34000 खर्च किए गए। चौंकाने वाली बात यह है कि कई योजनाओं में तो विभाग 1 रुपया भी खर्च नहीं कर पाया है। वही महज तीन योजनाओं में 50% या उससे ज्यादा बजट खर्च किया गया है।

50 प्रतिशत खर्च करना जरूरी

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन से जुड़े एक अधिकारी ने बताया कि योजना के अंतर्गत मिलने वाले बजट में से कम से कम 50% खर्च करना अनिवार्य होता है। अगर उससे भी कम बजट खर्च किया गया है तो यह लापरवाही है। क्योंकि बजट न खर्च हो पाने की स्थिति में अगले वित्तीय वर्ष में आकलन के आधार पर सरकार उसे कम भी कर सकती है।

देखें खर्च की स्थिति

योजना                    बजट          खर्च         प्रतिशत
मातृत्व स्वास्थ्य         155.02       3.47           2
बाल स्वास्थ्य            84.54        15.11        18
टीकाकरण              43.55          5.7          13
किशोर स्वास्थ्य          8.78          4.39          50
परिवार नियोजन         29.54         7.25          25
पोषण                     1.54          0.35         23
आईडीएसपी             12.25         2.21         18
एनपीसीडीसीएस          4.17         0.31          7
पीएमएनडीपी              4              0.2           1
एनपीपीसीडी              21               0            0

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें