कंवरपाल ने कहा कि किसानों को मौत के लिए उकसाने के जिम्मेदार कांग्रेस नेता हैं। कांग्रेस विधायक सदन को गुमराह कर रहे हैं। आंदोलनरत किसानों की मौत पर हमें भी दुख है। किसी की भी मौत दुखदायी होती है लेकिन बॉर्डर पर किसानों की मौत के लिए कांग्रेसी व वे नेता सीधे-सीधे जिम्मेदार हैं जिन्होंने बुजुर्ग किसानों को भी धरने पर बैठने के लिए उकसाया। इन नेताओं को चाहिए था कि बुजुर्ग किसानों के स्वास्थ्य का ध्यान रखते।
कांग्रेस विधायक बताएं कि कृषि कानूनों में क्या काला है? उन्होंने चुनौती देते हुए कहा कि तथ्यों पर आधारित बात करें। हम सदन में हर तथ्य प्रस्तुत करने और यह जानकारी देने को तैयार हैं कि कांग्रेस के 10 साल के शासनकाल में कौन सी फसल कितनी खरीदी गई और कितना भुगतान किया गया।
बोलने के लिए और समय न मिलने पर वेल में पहुंचीं भुक्कल
गीता भुक्कल दस मिनट से अधिक समय से सदन में बोल रहीं थीं। इसी दौरान स्पीकर की भूमिका निभा रहीं भाजपा विधायक सीमा त्रिखा ने उन्हें अपनी बात जल्दी खत्म करने को कहा लेकिन वह बोलती रहीं। त्रिखा ने भाजपा विधायक निर्मल रानी को बोलने के लिए मौका दे दिया। इसका विरोध करते हुए भुक्कल वेल में पहुंच गईं। इस पर स्पीकर ने उन्हें एक मिनट का समय और दे दिया। भुक्कल इसमें भी अपनी बात पूरी नहीं कर पाईं।
दिल्ली बॉर्डर पर 68 किसानों की मौत
सरकार ने सोमवार को विधानसभा में किसान आंदोलन के दौरान मृत्यु को प्राप्त किसानों का ब्योरा रखा। कांग्रेस विधायक आफताब अहमद व इंदु नरवाल ने यह सवाल पूछा था। सरकार ने बताया कि आंदोलन के दौरान 68 किसानों की मौत हुई है। मरने वालों में 21 हरियाणा और 47 पंजाब के किसान हैं। 51 लोगों की मौत स्वास्थ्य कारणों से हुई व 15 की सड़क हादसों में। दो लोगों ने आत्महत्या की है। मृतकों के परिजनों को वित्तीय सहायता देने का कोई विचार नहीं है। न ही शहीद का दर्जा दिया जाएगा।