इसके बाद विवाद बढ़ा तो मेयर और कैंथ के बीच तीखी झड़प होने लगी। इसी बीच कैंथ ने मेयर के खिलाफ अभद्र टिप्पणी कर डाली। इस पर सदन में जोरदार हंगामा हुआ। वार्ड नंबर आठ से भाजपा पार्षद अरुण सूद इस पर कड़ी आपत्ति जताते हुए निंदा प्रस्ताव लाए और इसके बाद कैंथ को एक दिन के लिए सदन से सस्पेंड कर दिया गया।
मामा भांजे का रिश्ता नहीं जेई से
मेयर ने कहा कि जेई कैंथ के क्षेत्र का है इसलिए वह वकील बनकर सदन में आए हैं। कैंथ ने कहा कि मामा भांजे की तरह मेरा जेई से कोई रिश्ता नहीं है। मेयर ने तत्काल जवाब दिया कि गलती करने पर मामा को झप्पियां नहीं पाईं, उसे सस्पेंड कराया है। मेयर ने कहा कि मैं तीन महीने जेल में रहकर आने वाला मेयर नहीं हूं। इसी के बाद विवाद और बढ़ गया।
कैंथ ने बाहर जाने से किया इनकार तो मेयर ने बुलाए मार्शल
अपने सस्पेंशन का विरोध करते हुए कैंथ ने मेयर को खरी खरी सुनाई और बाहर जाने से इनकार कर दिया। इस पर मेयर ने मार्शल को निर्देश दिए कि वह तत्काल कैंथ को सदन से बाहर कर दें। इस पर कांग्रेसी पार्षदों ने विरोध भी जताया। लेकिन मार्शल्स ने कैंथ को बाहर कर दिया।
सदन में देवेंद्र सिंह बबला ने सस्पेंशन का विरोध करते हुए कहा कि मैं मानता हूं, कैंथ ने आज कुछ ज्यादा ही बोल दिया है। उनकी तरफ से मैं माफी मांगता हूं। मेयर को बड़ा दिल करके कैंथ को वापस बुला लेना चाहिए। हमारे साथी के साथ गलत हुआ है। इसलिए मैं और गुरुबख्श रावत भी सदन छोड़ रहे हैं। हालांकि भाजपा पार्षदों के निवेदन के बाद बबला और रावत सदन से नहीं गए।
मेयर बोले-वापस बुलाओ, कैंथ ने बबला का ही फोन नहीं उठाया
बैठक से बाहर निकलने के बाद सतीश कैंथ नगर निगम से चले गए। बबला और गुरुबख्श रावत के बार बार कहने व भाजपा पार्षद अनिल दुबे के अनुरोध पर मेयर ने कहा कि चलो ठीक है, कैंथ को वापस बुला लो। उसके बाद बबला ने कैंथ को फोन किया लेकिन कैंथ ने फोन ही नहीं उठाया और अपने घर चले गए।