राजेश ने आरोप लगाया कि दीपक और उसकी पत्नी के साथ पुलिस वालों ने मारपीट की। पहले थाना डिवीजन पांच और फिर कौचर मार्केट चौकी में ले जाकर पीटा गया। जब उन्हें और चंडीगढ़ में रहने वाले उनके भाई राकेश को पता चला तो वह भी यहां पहुंच गए। राजेश ने आरोप लगाया कि पुलिस ने राकेश और उनकी पत्नी पूनम को भी बैठा लिया।
अगले दिन देर शाम आठ बजे के करीब एएसआई जसकरण सिंह ने 25 हजार रुपये लेकर उन्हें छोड़ा। राजेश ने आरोप लगाया कि पुलिस ने 21 फरवरी को पहले से दर्ज की हुई चोरी की एफआईआर में दीपक को नामजद कर दिया और 22 फरवरी को उसे अदालत में पेश किया। दीपक ने अदालत के बाहर से महिला वकील से फोन लेकर उन्हें सूचना दी तो पता चला कि पुलिस ने दो दिन का पुलिस रिमांड हासिल कर लिया।
अदालत ने भेजा जेल, पुलिस ले गई थाने
राजेश ने आरोप लगाया कि पुलिस ने 24 फरवरी को दीपक को फिर से अदालत में पेश किया। अदालत ने उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेजने का आदेश दिया। पुलिस ने राजेश को जेल भेजने के बजाए थाने में रखा और उसके साथ मारपीट की। अगले दिन उसे दोपहर को जेल छोड़ा गया। जब वह जेल में मिलने गए तो उन्हें यह कहकर लौटा दिया गया कि वह अभी आया है और चौबीस घंटे तक उसे मिलने नहीं दिया जा सकता।
राजेश ने बताया 26 फरवरी को परिजन दीपक से मिलने के लिए गए। दीपक एक साथी की मदद से मिलने के लिए आया। दीपक ने उन्हें बताया कि पुलिस ने उसे काफी मारा है और उसका शरीर पूरी तरह से दर्द हो रहा है। वह खून की उल्टियां कर रहा था। वह बार-बार यहीं कह रहा था कि उसे अस्पताल दाखिल करवा दिया जाए। देर रात को उन्हें पता चला कि दीपक को सिविल अस्पताल में दाखिल करवाया गया है। मगर देर रात को उसकी मौत हो गई।
राजेश ने आरोप लगाया कि दीपक ने उन्हें बताया था कि जब पुलिस उसे जेल छोड़ने के लिए आई थी तो जेल अधिकारियों ने पुलिस मुलाजिमों से कहा कि उसकी हालत सही नहीं है, वह काफी घायल है, वह उसे जेल में नहीं रख सकते। उसे इलाज के लिए पुलिस अस्पताल में दाखिल करवाए। जेल के निचले स्तर के मुलाजिमों ने मिलीभगत कर दीपक को जेल में डाल दिया। राजेश ने बताया अदालत को भी मामले की जानकारी दी गई है। अदालत ने परिजनों को आश्वासन दिया कि उन्हें पूरा इंसाफ दिया जाएगा।
क्या कहती हैं थाना प्रभारी
थाना डिवीजन पांच की प्रभारी एसआई रिचा रानी ने बताया कि उन पर लगाए जा रहे आरोप गलत है। उन्होंने कोई मारपीट नहीं की है। एफआईआर पहले की दर्ज है और जांच के बाद ही दीपक को गिरफ्तार किया गया था। जेल में एक दिन लेट छोड़ने की बात पर उन्होंने बताया कि कुछ औपचारिकताएं पूरी करने में थोड़ा समय लग गया था। जेल में कैदियों की गिनती हो चुकी थी। इस पर जेल प्रशासन ने उसे नहीं लिया। थाने में वापस लाकर उसकी रिपोर्ट बना दी गई थी। उन पर और उनकी टीम के एएसआई जसकरण पर पैसे लेने समेत बाकी के आरोप भी गलत है।
क्या कहते हैं एसीपी
एसीपी सिविल लाइन जतिंदर ने बताया कि वीडियो रिकार्डिंग के साथ मजिस्ट्रेट की निगरानी में दीपक के शव का पोस्टमार्टम होना है। परिजनों ने दीपक के साथ मारपीट के आरोप लगाए है। पोस्टमार्टम के दौरान चोट के निशान आते है तो बनती कार्रवाई की जाएगी।