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पंजाब में आरटीआई आवेदन बने सचिवों के लिए समस्या

Fri, 13 May 2016 07:36 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला/चंडीगढ़
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आरटीआई
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पंजाब के विभिन्न सरकारी विभागों में राइट टू इनफॉरमेशन (आरटीआई) के तहत आने वाले आवेदन विभागीय सचिवों के लिए भारी समस्या बनते जा रहे हैं।
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कई बार आवेदनों को लेकर अधिकारी परेशानी में पड़ जाते हैं, लेकिन कानून के अनुसार जानकारी मुहैया करवाना उनके लिए अनिवार्य बन जाता है। वैसे तो इस एक्ट को 2005 में मंजूरी मिली थी, लेकिन पिछले छह सालों में इसके तहत जानकारी पाने वाले आवेदनों में भारी इजाफा हुआ है।

पंजाब के सचिवालय में आरटीआई की फाइलों में उलझे एक उच्च अधिकारी का कहना था कि कई बार आवेदक ऐसी जानकारी मांगते हैं, जिसका कोई सिर पैर नहीं होता। आवेदकों को एक्ट की पूरी जानकारी तक नहीं होती और वह किसी उच्च अधिकारी को हटाने तक की अपील करते हैं।
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हालांकि, विभाग को आरटीआई के तहत मांगी गई हर जानकारी देनी होती है, इसलिए विभाग को कोशिश होती है कि ज्यादा से ज्यादा जानकारी मुहैया करवाई जा सके।

पंजाब के राज्य सूचना आयोग के डाटा पर नजर दौड़ाई जाए तो वर्ष 2005 में इस एक्ट के तहत मात्र 20 आवेदन आए थे, लेकिन उसके बाद से आवेदनों की संख्या साल दर साल बढ़ती चली गई।
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वर्ष 2015 में कुल 7108 आवेदन प्राप्त हुए, जिसमें से 6670 का निपटारा कर दिया गया। वर्ष 2013 से आवेदनों की संख्या सात हजार से ऊपर ही रही है। प्रत्येक विभाग में एक से दो कर्मचारियों को इन तरह के आवेदनों के जवाब तैयार करने के लिए रखा गया है।

पिछले कुछ सालों में प्राप्त आवेदन और उनका निपटारा
वर्ष    लंबित    आवेदन प्राप्त    निपटारा    शेष
2010    1391    5101    5522    880
2011    880    5279    4870    1289
2012    1289    5667    5413    1543
2013    1543    7066    7125    1484
2014    1484    7112    6641    1955
2015    1955    7108    6670    2393
2016    2393    1233    847
(2016 में फरवरी तक का डाटा)
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