गुरुग्राम के मंडलायुक्त मोहम्मद शाईन
कपूर ने बताया कि वर्ष 2007-10 के बीच अंबाला में पेड़-पौधे लगाने, नर्सरी, हर्बल पार्क विकसित करने की मनरेगा परियोजना में घोटाला किया गया था। कुल 25.14 करोड़ रुपये को वन विभाग के अधिकारी व अंबाला के तत्कालीन डीसी व एडीसी डकार गए। घोटाले की जांच रिपोर्ट तत्कालीन डीजीपी (विजिलेंस) शरद कुमार ने 16 नवंबर 2012 को मुख्य सचिव हरियाणा को सौंपी थी।
जांच रिपोर्ट में वन विभाग के डीएफओ जगमोहन शर्मा, फॉरेस्ट रेंज ऑफिसर गोकुल शर्मा, राजेश राणा, प्रशांत शर्मा, विनोद कुमार, लक्ष्मण दास, दीपक अलहाबादी, तत्कालीन जिला उपायुक्त आईएएस समीर पाल सरो, मोहम्मद शाईन, रेणु फुलिया, सुमेधा कटारिया व आरपी भारद्वाज को भ्रष्टाचार का दोषी पाया गया।
डीजीपी (विजिलेंस) ने जहां वन विभाग के अधिकारियों के विरुद्ध धोखाधड़ी, गबन, जालसाजी का मुकद्दमा दर्ज करने की सिफारिश की, वहीं पांचों आईएएस के विरुद्ध सरकार को अपने स्तर पर कार्रवाई करने की रिपोर्ट दी। न तो तत्कालीन हुड्डा सरकार और न ही इस भाजपा सरकार ने किसी के विरुद्ध कोई कारवाई की।
नवीन अक्षय ऊर्जा विभाग की निदेशक रेणु फुलिया
13 जनवरी 2015 को वर्तमान मुख्यमंत्री को इस घोटाले की शिकायत की गई थी। उस पर 29 जनवरी को वन विभाग के अधिकारी जगमोहन शर्मा सहित 9 कर्मियों पर स्टेट विजिलेंस ब्यूरो अंबाला में एफआईआर दर्ज करा दी गई, मगर दोषी आईएएस पर अभी तक सरकार मेहरबान है। पीपी कपूर ने 31 जनवरी 2015 को लोकायुक्त हरियाणा में इसकी शिकायत की।
सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के निदेशक समीर पाल सरों
जांच में दोषी पाते हुए लोकायुक्त जस्टिस एनके अग्रवाल ने 26 मई 2017 को चारों आईएएस पर भ्रष्टाचार निरोधक कानून के तहत आपराधिक मुकद्दमा दर्ज कराने व कार्रवाई की रिपोर्ट 90 दिन में हरियाणा सरकार से तलब की थी, जो आज तक नहीं भेजी गई, न ही कार्रवाई हुई। उल्टा, लोकायुक्त जांच में दोषी एचसीएस रेणु फुलिया व सुमेधा कटारिया को पदोन्नत कर आईएएस अधिकारी बना दिया गया। जबकि आईएएस अधिकारी आरपी भारद्वाज सेवानिवृत्त हो गए।
कार्रवाई न होने पर लोकायुक्त नाखुश
लोकायुक्त जस्टिस एनके अग्रवाल भी आपराधिक मामला दर्ज न होने और कार्रवाई रिपोर्ट न भेजने पर नाखुश हैं। राज्यपाल को भेजी अपनी सालाना रिपोर्ट में भी उन्होंने इसका जिक्र किया है।