पंजाब में ड्रग तस्करी मामले में हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि इस मामले को पॉलिटिकल एजेंडा बनाकर बेवजह तूल न दिया जाए।
बुधवार को मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कहा कि यह गंभीर सामाजिक समस्या है और इसका समाधान संयुक्त प्रयास से ही निकल सकता है।
चीफ जस्टिस संजय किशन कौल एवं जस्टिस अरुण पल्ली की खंडपीठ ने मामले में फिलहाल सीबीआई जांच से इंकार कर दिया है।
हाईकोर्ट ने कहा कि सीबीआई के अलावा कई अन्य एजेंसियां भी हैं, जो मामले की जांच कर सकती हैं। हाईकोर्ट ने पंजाब पुलिस पर भरोसा जताते हुए मामले की जांच जारी रखने के निर्देश जारी किए हैं। मामले की अगली सुनवाई पांच मई को होगी।
हाईकोर्ट ने कहा कि यदि पुलिस जांच के दौरान किसी भी प्रकार की कोई समस्या आती है या जांच प्रभावित होती दिखाई देती है तो ऐसी स्थिति में हाईकोर्ट में अपील दाखिल की जा सकती है।
हाईकोर्ट ने कहा कि कोर्ट खुद मामले की निगरानी कर रहा है, क्योंकि ड्रग से आने वाली पीढ़ियां बुरी तरह प्रभावित हो सकती हैं।
मामले की सुनवाई के दौरान पूर्व डीजीपी (जेल) शशिकांत ने सीबीआई जांच का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि वह 30 साल तक सिस्टम का हिस्सा रहे हैं और वे जानते हैं कि पुलिस किस तरह इस मामले को दबा देगी।
इस पर खंडपीठ ने कहा कि कोर्ट को नहीं लगता कि मामले को सीबीआई के पास सुपुर्द करने से ड्रग तस्करी पर काबू पाया जा सकता है।
हाईकोर्ट ने साफ किया कि वे इस जांच से संतुष्ट हैं। इसके साथ ही मामले में जगमीत बराड़ की ओर से कुछ नेताओं के नाम सामने आने की बात पर हाईकोर्ट ने कहा कि जांच पूरी हो जाने के बाद इसकी रिपोर्ट के बाद ही हाईकोर्ट अगला फैसला करेगा।
इसके साथ ही कोर्ट ने पंजाब सरकार को 2 माह का समय देते हुए इस मामले में मजबूत जांच रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए।
इससे पूर्व सुनवाई के दौरान एनसीबी की ओर से मामले की जांच के लिए जिन-जिन साधनों की आवश्यकता है, उसकी एक सीलबंद रिपोर्ट हाईकोर्ट में पेश की गई।