चालीस साल पुरानी दोस्ती से राजनीतिक सफर की शुरुआत करने वाले पूर्व केंद्रीय मंत्री और और विधायक विनोद शर्मा और सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा के बीच सब कुछ ठीक नहीं है। दोनों दोस्त एक दूसरे के बारे में टिप्पणी करने से भले ही बच रहे हैं, लेकिन हुड्डा और शर्मा के बीच की दूरियां उजागर हो चुकी हैं।
पिछले पंद्रह दिनों में हरियाणा की कांग्रेस में हुई उथल-पुथल ने यह स्पष्ट कर दिया है कि पार्टी में सब कुछ ठीक नहीं है। पिछले नौ सालों में हुड्डा के सीएम रहने के दौरान विनोद शर्मा हर दिक्कत परेशानी में साए की तरह उनके साथ रहे हैं।
यहां तक कि छह माह पहले अंबाला में हुई रैली में हुड्डा ने विनोद शर्मा की तारीफ में कसीदे पढ़ते हुए गहरी दोस्ती का परिचय दिया था। लेकिन अब उनके हाव-भाव बदल गए हैं।
दोनों नेताओं के बीच बढ़ी राजनीतिक तल्खी के पीछे वजह क्या है। इसको लेकर हरियाणा की सियासत में खासा उबाल है। हुड्डा और विनोद शर्मा के बीच बढ़ी दूरियों के साफ संकेत इस रविवार को रादौर में हुई पब्लिक मीटिंग में नजर आ गया था।
यहां विनोद शर्मा ने भाजपा में शामिल होने संबंधी पत्रकारों के सवाल पर तो महज अनुमान लगाना बताया, लेकिन उनके वक्तव्य से साफ नजर आया कि वे अब हुड्डा सरकार के साथ लंबे समय तक चलने वाले नहीं हैं।
विनोद शर्मा ने अपने भाषण में हुड्डा सरकार के बारे में किसी तरह का कोई जिक्र तक नहीं किया। अलबत्ता इशारों-इशारों में वह राजनेताओं को नसीहत देते रहे कि सत्ता आम आदमी की सेवा का माध्यम है न कि सुख भोगने का।
चर्चा यह है कि कुरुक्षेत्र में होने वाली रैली में शर्मा की भविष्य की रणनीति घोषणा हो जाएगी।
हरियाणा में गरीब सवर्णों को मिले दस फीसदी आरक्षण का मुद्दा इन दिनों वे सभी 90 विधानसभा क्षेत्रों में उठा रहे हैं।