जबकि नौवां आरोपी नेपाली मूल का ही था, जो नाबालिग था। गिरफ्तार आरोपी गद्दी खेड़ी गांव निवासी पवन, प्रमोद उर्फ पदम, सरवर उर्फ बिल्लू, मनबीर उर्फ मन्नी, सुनील उर्फ मिढ़ा, सुनील उर्फ शीला और राजेश उर्फ घुचडू को 22 दिसंबर 2015 को फास्ट ट्रैक कोर्ट की महिला जज ने फांसी की सजा सुनाई थी।
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को बचाव पक्ष की अर्जी सुनवाई के लिए मंजूर कर ली। साथ ही अगले आदेशों तक सातों युवकों की फांसी की सजा पर अंतरिम रोक लगा दी। - एडवोकेट जेके गक्खड़, बचाव पक्ष
महिला जज सीमा सिंहल ने यह की थी टिप्पणी
लोग महिला को कमजोर समझते हैं। मैं इंसान होने के साथ एक महिला भी हूं। महिला होने के नाते उनका दर्द समझती हूं। मुझे न्यायिक अधिकारी होने के नाते जिम्मेदारी मिली है। मैं महिलाओं की रोने और चिल्लाने की आवाज सुन सकती हूं। जिन पर जुर्म हुए।
कोई दोषी बेरोजगार तो कोई फैक्ट्री में मजूदर
नेपाली मूल की युवती के साथ दुष्कर्म व हत्या के मामले में दोषी करार दिए जा चुके सातों युवक गद्दी खेड़ी गांव के हैं। राजेश उर्फ घुचड़ू बेरोजगार है और गांव में घूमता रहता था। सुनील उर्फ शीले अपनी कोल्ड ड्रिंक की दुकान पर काम करता था।
सरवर उर्फ बिल्लू लकड़ी का काम करता था। एक दोषी करार मनबीर है। सुनील उर्फ माड़ा गांव में ही शराब के ठेके चलाता था। वहीं, पवन किसी फैक्ट्री में काम करता था। प्रमोद उर्फ पदम गांव के पूर्व सरपंच का बेटा है और खेती करता था। सोमबीर एक निजी फैक्ट्री में काम करता था।