सूत्रों के अनुसार कर्मचारियों के खिलाफ होने की आहट को भांपते हुए भाजपा भी सतर्क हो गई है। भाजपा अंदरखाने अपने कार्यकर्ताओं के जरिये डैमेज कंट्रोल का प्रयास करेगी। इसके अलावा अंदरखाते यह भी मंथन चल रहा है कि कर्मचारियों के विरोध को शांत कैसे किया जाए। भाजपा का थिंक टैंक इस पर भी गंभीरता से मंथन कर रहा है। साथ ही बेलगाम अधिकारियों पर भी नकेल कसने की तैयारी चल रही है, ताकि कर्मचारियों को उकसाने वाले फैसले रोके जा सकें। कर्मचारियों के सीएम सिटी करनाल में शक्ति प्रदर्शन की घोषणा के बाद तो भाजपा नेतृत्व अलर्ट हो गया है।
अंबाला, जींद-कैथल में भी चालकों को हटाने के आदेश जारी
रोडवेज के 365 अनुबंध चालकों की सेवाएं समाप्त करने के निर्णय पर डिपो में अमल शुरू हो गया है। फरीदाबाद डिपो के बाद अब अंबाला, जींद और कैथल डिपो ने भी 2016 में भर्ती चालकों को नौकरी से हटाने के आदेश जारी कर दिए हैं। इससे रोडवेज कर्मचारियों में रोष और बढ़ गया है।
सरकार के पास अब भी वक्त, चेत जाए : कमेटी
रोडवेज कर्मचारी तालमेल कमेटी के वरिष्ठ सदस्य इंद्र सिंह बधाना, वीरेंद्र धनखड़, हरिनारायण शर्मा, सरबत पूनिया, दलबीर किरमारा, सुलतान सिंह, पहल सिंह तंवर ने कहा कि कर्मचारियों का उत्पीड़न करना सरकार बंद करे। अब भी सरकार के पास समय है, बातचीत के जरिये हर मसला सुलझाया जा सकता है। कर्मचारियों ने अगर चुनावों में विरोध का निर्णय एकमत से ले लिया तो फिर उसे पलटना मुश्किल होगा। दलबीर किरमारा पहले ही निगम चुनावों में भाजपा के खिलाफ वोट की अपील कर्मचारियों से कर चुके हैं।