ऐसे में सड़क और बाजार सुधार परियोजनाएं पूरी तरह फंडिंग पर निर्भर हो गई हैं। यदि बजट समय पर स्वीकृत नहीं हुआ, तो कई महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट अगले वित्तीय वर्ष 2026-27 तक लटक सकते हैं। नगर निगम ने बाजारों के भीतर पार्किंग विकास और कई सड़कों के नवीनीकरण के लिए करीब 100 करोड़ रुपये का बजट प्रस्ताव तैयार किया है। फाइल तैयार है, लेकिन बजट मंजूरी अनिश्चित है। सूत्रों के अनुसार निगम को अधिकतम 70 करोड़ रुपये तक मिल पाने की उम्मीद है। दूसरी ओर, मनीमाजरा की जमीन बेचकर बड़ा बजट जुटाने की योजना भी फिलहाल अटकी हुई है, क्योंकि यह एजेंडा अभी तक सदन से पास नहीं हुआ। ऐसे में जमीन बिक्री से बजट मिलने की संभावना भी अगले कुछ महीनों तक कम ही है।
नगर आयुक्त अमित कुमार ने हाल ही में भाजपा पार्षद सौरभ जोशी के साथ उनके वार्ड के दौरे के दौरान भी स्पष्ट कहा था कि फरवरी से पहले बड़े विकास कार्यों की शुरुआत मुश्किल है। निगम ने केंद्र से 250 करोड़ रुपये की मांग भेजी है, लेकिन यह कब तक मिलेगा, इस पर अभी कोई स्पष्टता नहीं है। निगम का कहना है कि बजट मिलते ही कार्यों की शुरुआत की जाएगी। हालांकि 41 करोड़ रुपये की लागत से सड़कों के निर्माण के लिए जारी टेंडरों के तहत कई कार्य 15 दिसंबर तक पूरे होने की उम्मीद है।
बाजारों में विकास की कमी पर बढ़ती नाराजगी
शहर के कई बाजार वर्षों से बुनियादी ढांचे की मरम्मत का इंतजार कर रहे हैं। सेक्टर 38 और 47 सहित कई बाजारों में सार्वजनिक शौचालय निर्माण के बाद से कभी भी मरम्मत नहीं हुई। व्यापारी लगातार नाराज हैं और चंडीगढ़ व्यापार मंडल समिति कई बार नगर निगम को बाजारों की खस्ताहाल स्थिति और मूलभूत सुविधाओं की कमी की शिकायत कर चुकी है। अब सभी की निगाहें बजट पर हैं, जिसकी देरी से विकास कार्य और लंबा खिंच सकता है।