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Chandigarh: लगातार बढ़ रही आरएलए की कमाई, इसलिए निगम की नजर...मिला तो वित्तीय संकट हो जाएगा दूर

Sat, 02 Nov 2024 04:15 PM IST
निवेदिता वर्मा रिशु राज सिंह, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

आरएलए की मुख्य रूप से कमाई गाड़ियों के पंजीकरण पर आने वाला रोड टैक्स, फैंसी नंबरों की नीलामी व अन्य है। नगर निगम पिछले कई वर्षों से आएलए की मांग कर रहा है। मेयर कुलदीप कुमार ने हाल ही में लिखित में पंजाब के राज्यपाल व चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाबचंद कटारिया से आरएलए की मांग की है।
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चंडीगढ़ नगर निगम - फोटो : फाइल
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विस्तार
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चंडीगढ़ में रजिस्टरिंग एंड लाइसेंसिंग अथॉरिटी (आएलए) ने वर्ष 2023-24 में सड़क मोटर वाहन कर और अन्य शुल्कों से कुल 310.73 करोड़ कमाए हैं। 
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आरएलए का राजस्व हर साल बढ़ रहा है। यही कारण है कि पिछले काफी समय से नगर निगम की नजर आरएलए पर है। मेयर और पार्षदों को लगता है कि आरएलए निगम के पास आ गया तो निगम का वित्तीय संकट दूर हो जाएगा। आरएलए लेने के पीछे उनका तर्क है कि वो करीब 2000 किमी की सड़क को मेंटेन करते हैं तो टैक्स भी उन्हें ही मिलना चाहिए।

नगर निगम पिछले कई वर्षों से आएलए की मांग कर रहा है। मेयर कुलदीप कुमार ने हाल ही में लिखित में पंजाब के राज्यपाल व चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाबचंद कटारिया से आरएलए की मांग की है। बार-बार आरएलए मांगने के पीछे बड़ा कारण आरएलए का राजस्व है, जो काफी ज्यादा है और हर साल बढ़ता ही जा रहा है। 
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वर्ष 2021-2022 में आरएलए ने 182.91 करोड़ तो 2022-2023 में 253.65 करोड़ कमाए थे। 2023-24 में कमाई बढ़कर 310.73 करोड़ हो गई। आरएलए की मुख्य रूप से कमाई गाड़ियों के पंजीकरण पर आने वाला रोड टैक्स, फैंसी नंबरों की नीलामी व अन्य है। 29 अक्तूबर को हुई सदन की बैठक में भी कई पार्षदों ने यह मांग उठाई। पार्षद गुरबख्श रावत ने यहां तक कह दिया कि कमाई वाले सारे विभाग प्रशासन के पास हैं और खर्चे वाले नगर निगम के पास। कहा कि भारतीय संविधान के 74वें संशोधन अधिनियम के अनुसार निगम को प्रशासन के कुल राजस्व का 30 फीसदी मिलना चाहिए लेकिन प्रशासन हक मार रहा है। कहा कि निगम करीब दो हजार किलोमीटर की सड़कों की मरम्मत करता है लेकिन रोड टैक्स प्रशासन वसूल रहा है। यह किस तरह का भेदभाव है।

प्रशासन का तर्क- विभाग देना वित्तीय संकट दूर करने का समाधान नहीं

हाल ही में प्रशासक व अन्य अधिकारियों के साथ निगम की वित्तीय स्थिति पर चर्चा हुई थी। मेयर ने आरएलए की मांग की थी। कहा कि अगर यह विभाग निगम को मिलेगा तो इससे उनका राजस्व काफी बढ़ सकता है। हालांकि, बैठक में प्रशासन के अधिकारियों ने इसके लिए मना कर दिया। एक अधिकारी ने यहां तक कहा कि वित्तीय संकट दूर करने के लिए यह कोई समाधान नहीं है, क्योंकि कल को निगम कोई और विभाग भी मांगेगा।

मेयर ने कहा कि इंदौर इसलिए नंबर वन है क्योंकि वहां के नगर निगम के पास काफी बजट है। वह ही आरएलए और ट्रांसपोर्ट भी देखता है। जब वह सड़कों की मरम्मत करते हैं तो उसमें चलने वाली गाड़ियों का टैक्स भी उन्हें ही मिलना चाहिए। हालांकि प्रशासन के अधिकारी इस पर सहमत नहीं हैं। प्रशासन ने निगम को खर्चों में कटौती करने, संपत्ति कर-वेंडरों का बकाया वसूलने और खुद के कमाई के साधन बढ़ाने के निर्देश दिए हैं।

सड़क मोटर वाहन कर और अन्य शुल्कों पर कुल राजस्व संग्रहित

अवधि                 - कमाई
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2021-2022        - 1,82,91,29,474
2022-2023        - 2,53,65,14,730
2023-2024        - 3,10,73,46,278


आरएलए विभाग नगर निगम को ही मिलना चाहिए, क्योंकि निगम अधिकतर सड़कों को बनाता है तो उन सड़कों पर चलने वाले वाहनों का टैक्स भी मिलना चाहिए। हम लगातार इसकी मांग कर रहे हैं क्योंकि निगम के पास सिर्फ खर्च करने वाले विभाग की है। - कुलदीप कुमार, मेयर
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