फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

'84 के दंगों में हमें मार दिया, पर हम जिंदा हैं'

Wed, 18 Feb 2015 05:31 PM IST
जितेंद्र राठी/अमर उजाला, रेवाड़ी(हरियाणा)
विज्ञापन
विज्ञापन
1984 के दंगों की मृतकों की सूची में शामिल दंपति अपने जिंदा होने का प्रमाण पत्र लेकर दर-दर की ठोकरें खा रहा है। उनका आरोप है कि परिजनों ने मुआवजा राशि हड़पने के लिए उन्हें मृत बता दिया था। वह दंगे के दौरान जोधपुर में थे और परिजनों ने उन्हें धमकाकर चुप रहने को कहा था।
विज्ञापन


बकौल दंपति, उन्होंने रेवाड़ी पुलिस और सीबीआई को भी शिकायत की मगर कोई कार्रवाई नहीं हो सकी। परिजनों ने पीड़ित व्यक्ति की एक बहन को भी मृत घोषित किया था।

वर्तमान में रेवाड़ी की नई आबादी वार्ड नंबर-एक में रहने वाले अमर सिंह (73) के मुताबिक, वह परिजनों के साथ 1984 के दंगों से पहले दिल्ली के सुल्तानपुरी के ब्लाक बी रहता था। परिजनों ने राशन कार्ड में उसका नाम दर्ज करा रखा था। अमर सिंह की शादी 1982 में शीला कौर पुत्री घनश्याम सिंह के साथ हुई।
विज्ञापन


1984 के दंगे के दौरान अमर सिंह पत्नी के साथ बहन कांता की डिलीवरी कराने जोधपुर चला गया। उस दौरान वहां उन्हें करीब डेढ़ माह तक रहना पड़ा। वह दंगे के कारण केश कटवाकर और पत्नी को साड़ी पहनाकर ट्रेन से रेवाड़ी पहुंचे। यहां अमर सिंह के माता-पिता रहते थे।

दंगा शांत होने के बाद जब दिल्ली सुल्तानपुरी गए तो आस पड़ोस के लोग उन्हें जिंदा देखकर हैरत में पड़ गए। वहां लोगों से पता चला कि परिजनों ने अमर सिंह, उसकी पत्नी और छोटी बहन बलजीत कौर (जयपुर) को मृतक घोषित करा दिया था। परिजनों ने उस समय दंपति को वहां से डराकर वापस भेज दिया। खतरे को भांपते हुए अमर सिंह वापस रेवाड़ी माता-पिता के पास आ गया।
Trending Videos
विज्ञापन

1984 दंगा पीड़ितों में शामिल करने की मांग

उसका आरोप है कि मुआवजा पाने के लिए परिजनों ने यह साजिश रची। उसने सरकार से मांग की है कि उनके साथ न्याय किया जाए तथा 1984 दंगा पीड़ितों की सूची में उन्हें भी शामिल किया जाए। उन्होंने बताया कि वह अपने परिवार के साथ आज भी रेवाड़ी में किराये के मकान में रहते हैं और मजदूरी कर परिवार का गुजारा चला रहे हैं।

बताया जान का खतरा
अमर सिंह ने बताया कि 1984 के सिख दंगों में मृत दिखाकर परिजनों ने ही उन्हें चोट पहुंचाई है। आज वह सरकार की ओर से दिए गए फ्लैटों में रह रहे हैं और उन्हें मरा हुआ दिखाकर लाखों रुपये का मुआवजा डकार गए। उसका कहना है कि उसके परिवार को जान का खतरा है कि क्योंकि इस झूठ का राज खुलने से वह लोग उनकी जान के दुश्मन बन गए हैं।

जमीन पर भी किया कब्जा
अमर सिंह ने बताया कि भारत-पाक बंटवारे के समय उन्हें राजस्थान की तहसील किशनगढ़ के गांव पालपुर में सरकार ने जमीन दी थी। यहां उनकी जमीन है, लेकिन इस जमीन पर कुछ लोगों ने कब्ज कर लिया है।

कई साल पहले की थी शिकायत
अमर सिंह के मुताबिक, यहां कई वर्ष पहले जिला प्रशासन और गोकलगेट चौकी में शिकायत दी, लेकिन उस समय कार्रवाई से यह कह कर इन्कार कर दिया कि मामला दिल्ली का है और दिल्ली में ही शिकायत करो। उसके बाद दिल्ली में सीबीआई के एक अधिकारी को लिखित शिकायत दी थी, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। अब जिला प्रशासन के माध्यम से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर न्याय की गुहार लगाएंगे।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें