चावल की गुणवत्ता बताएगा साॅफ्टवेयर।
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किसानों के लिए एक अच्छी खबर है। अब वह खुद अपनी फसल का मूल्य निर्धारित कर सकेंगे। उन्हें पता होगा कि उनकी फसल का दाना-दाना कितना मजबूत है। इसके लिए केंद्रीय वैज्ञानिक उपकरण संगठन (सीएसआईओ) ने एक सॉफ्टवेयर तैयार किया है। इसके जरिए चावल के हर दाने की गुणवत्ता का पता लगाया गया है। इस पर प्रयोग सफल रहा। यह सॉफ्टवेयर जल्द बाजार में आएगा। इसके लिए आठ कंपनियों से करार हो गया है।
सीएसआईओ की तकनीकी अधिकारी डॉ. ममता शर्मा ने इस पर दो साल तक शोध किया और राइस ग्रेन एनालिसिस सॉफ्टवेयर तैयार किया। इस सॉफ्टवेयर के जरिए पता लगाया गया कि चावल का हर दाना कितना मजबूत है। इस पर सफलता मिली है। सॉफ्टवेयर कंप्यूटर से संचालित है।
वैज्ञानिकों के मुताबिक राइस की एक बेहतर फोटो स्कैन होगी और उसके बाद सॉफ्टवेयर फोटो के जरिए हर दाने का विश्लेषण करेगा। चावल कितना ठोस है, कितने चावल टूटे हुए हैं और कितने खोखले हैं। इन सभी का पता लग जाएगा। जैसे ही चावल की गुणवत्ता का पता लग जाएगा तो उसका मूल्य निर्धारण कर लिया जाएगा। बेहतर चावल होने पर अच्छे पैसे मिलेंगे और कुछ गुणवत्ता खराब होने पर अलग रेट मिलेंगे। राइस मिल संचालकों के लिए यह अधिक कारगर होगा।
जल्द बाजार में आएगा सॉफ्टवेयर
सीएसआईओ की तकनीकी अधिकारी ममता शर्मा का कहना है कि जल्द ही सॉफ्टवेयर बाजार में आएगा। किसानों के लिए भी यह लाभदायक होगा। अगला शोध अन्य फसलों की गुणवत्ता पता लगाने के लिए होगा। उस पर काम शुरू करेंगे। मालूम हो कि देश में चावल का कारोबार बड़े पैमाने पर होता है। विदेशों को भी चावल भिजवाया जाता है। ऐसे में बाहर चावल बेहतर जाए और उसका मूल्य किसानों या राइस मिल संचालकों को मिले, उसके लिए सॉफ्टवेयर अधिक कारगर होगा। सीएसआईओ को लगातार सफलता मिल रही है। इससे पहले खाद्य तेलों में मिलावट का पता लगाने के लिए उपकरण बनाया और कोरोना बचाव के लिए विशेष मास्क तैयार किए गए। कई अन्य अध्ययन भी चल रहे हैं जो जल्द सामने आएंगे।