धान का उचित मूल्य न मिलने और स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट लागू करने की मांग को लेकर भारतीय किसान यूनियन (हरियाणा) ने पिपली अनाज मंडी के गेट पर क्रमिक अनशन शुरू कर दिया है।
वीरवार को अनशन पर बैठे भाकियू सदस्यों ने मांगें पूरी न होने पर व्यापारियों तथा सरकार के खिलाफ मंडी गेट पर जोरदार नारेबाजी की। साथ ही व्यापारियों तथा सरकार पर किसान विरोधी होने का आरोप भी लगाया।
पांच अक्तूबर तक चलने वाले भाकियू के इस क्रमिक अनशन में रोजाना राज्य के अलग-अलग जिलों के भाकियू सदस्यों की ड्यूटियां लगाई हैं।
अनशन पर बैठे जिला उपाध्यक्ष यमुनानगर कृष्ण पाल व ब्लॉक अध्यक्ष छछरौली गुरमुख सिंह ने संयुक्त बताया कि वे व्यापारी व किसान विरोधी रवैये के विरोध में अनशन पर बैठे हैं।
उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष बारीक धान 4000 से 4500 के रेट में बिकी थी, जबकि इस वर्ष व्यापारियों ने 2200 से 2700 के रेट में धान खरीदी है। यह दिन-रात खेतों में पसीना बहा रहे किसानों के लिए घाटे का सौदा है।
उनके अनुसार प्रदेश स्तर के इस अनशन में 5 अक्तूबर तक रोजाना अलग-अलग जिलों के ग्यारह लोग अनशन में बैठेंगे। यूनियन का यह अनशन पांच अक्तूबर चक चलेगा और छह अक्तूबर को भाकियू पिपली अनाज मंडी में किसान महापंचायत का आयोजन करेगी।
क्रमिक अनशन में यमुनानगर के ग्यारह किसान शामिल हुए हैं, जिनमें महिंद्र सिंह, गुरमुख सिंह, राजपाल, नरसिंह, करनैल सिंह, साहब सिंह, रमेश कुमार, अमरनाथ, कृष्ण पाल, राजबीर व कर्म सिंह ने पिछले वर्ष के समान मूल्य पर धान की खरीद की मांग रखी।
व्यापारियों का पूल तोड़, हैफेड से कराएंगे खरीद: चढूनी
भाकियू के प्रदेशाध्यक्ष गुरनाम सिंह चढूनी का कहना है कि मंडी सेक्रेटरी तो कह रहे हैं कि अगर सरकार उन्हें आदेश देगी तो वे पिछले वर्ष के रेट पर धान की खरीद करने को तैयार हैं।
लेकिन सरकार की ओर से कोई मदद मिलती नहीं दिख रही। उन्होंने कहा कि व्यापारियों के पूल (एकता) को तोड़ने के लिए हैफेड एजेंसी का निर्माण किया गया था।
जो व्यापारी के मुकाबले में बोली दे सकती है। अत: हैफेड से बारीक धान की खरीद कराने के लिए छह अक्तूबर को पीपली में किसान महापंचायत बुलाई है।
सरकार जो रेट तय करेगी, उसी अनुसार खरीद : मामचंद
पिपली अनाज मंडी के सचिव मामचंद खेडवा ने बताया कि पिछले वर्ष प्राइवेट खरीददारों ने धान का रेट ज्यादा दिया था, सरकार ने नहीं।
उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्हें सरकारी नियमों के अनुसार ही चलना पड़ता है और सरकार धान का जो भी रेट तय कर उन्हें आदेश देगी, वे अनुपालना करके उसी रेट पर खरीददारी शुरू करा देंगे। फिलहाल सरकार ने पीआर धान का मूल्य 1400 रुपये निर्धारित किया है।