पंजाब राजस्व अधिकारी संघ के बैनर तले राज्य के सभी राजस्व अधिकारी आठ दिसंबर से सामूहिक अवकाश पर चले गए हैं। एसोसिएशन के अध्यक्ष गुरदेव सिंह धाम ने बताया कि एसोसिएशन ने अपना विरोध दर्ज कराने के लिए तीन स्तर पर कार्रवाई की तैयारी की है।
इसके तहत राजस्व अधिकारी आठ दिसंबर से अनिश्चितकालीन सामूहिक अवकाश पर चले गए हैं, जबकि 9 दिसंबर को राजस्व अधिकारी डीएसपी विजिलेंस कार्यालय होशियारपुर के समक्ष सुबह 11 बजे से दोपहर 2 बजे तक विरोध रैली करेंगे। इसके बाद 10 दिसंबर को हड़ताल में शामिल सभी एसोसिएशनों के सदस्य सुबह 11 बजे से शाम 4 बजे तक मोरिंडा में सीएम हाउस तक रैली और मार्च करेंगे।
उन्होंने आरोप लगाया कि नायब तहसीलदार संदीप कुमार और रजिस्ट्री क्लर्क महिलपुर तहसील गढ़शंकर जिला होशियारपुर की अवैध गिरफ्तारी और उनके खिलाफ पीसी अधिनियम की धारा 7 और 7ए के तहत झूठी एफआईआर दर्ज किए जाने के खिलाफ राजस्व अधिकारी लामबंद हुए हैं।
उन्होंने कहा कि विजिलेंस ब्यूरो रेंज जालंधर थाने में मुलाजिमों को बिना किसी कसूर के झूठे मामलों में फंसाया गया है, क्योंकि इन मुलाजिमों से रिश्वत संबंधी कोई मांग, स्वीकृति या भ्रष्टाचार के पैसे की वसूली जैसा कोई मामला सामने नहीं आया है। गुरदेव सिंह धाम ने कहा कि पीड़ित नायब संदीप कुमार के सीधे बयान से हमारे संज्ञान में एक बहुत ही विचलित करने वाला तथ्य सामने आया है कि जब संदीप कुमार को इलाज के लिए अस्पताल में दाखिल कराया गया तो एक विजिलेंस सब-इंस्पेक्टर अजयपाल ने डीएसपी निरंजन सिंह के निर्देश पर संदीप के दोनों हाथों में हथकड़ी और पैरों में बेड़ियों के साथ अस्पताल के बिस्तर पर बांध दिया और अस्पताल का कमरा बंद कर दिया। इस दौरान संदीप के साथ अमानवीय व्यवहार किया गया।
उन्होंने कहा कि पीआरओए इस अनुशासनहीन और गैर-जिम्मेदार इंस्पेक्टर को तत्काल बर्खास्त करने की मांग करता है, जिसने माननीय सर्वोच्च न्यायालय और भारत के संविधान के खिलाफ उक्त अधिकारी के साथ अमानवीय व्यवहार किया। उन्होंने आगे बताया कि एसोसिएशन के लगभग 60-70 सदस्यों ने बुधवार को प्रदेश की राजस्व मंत्री अरुणा चौधरी से मुलाकात की और दोषी अधिकारियों- डीएसपी विजिलेंस निरंजन सिंह और आईओ इंस्पेक्टर चमकोर सिंह के खिलाफ कार्रवाई की मांग की लेकिन सभी सदस्य यह जानकर दंग रह गए कि राजस्व मंत्री ने यही बात पूछी कि एसोसिएशन की मांग क्या है? जबकि राजस्व अधिकारियों की हड़ताल पिछले महीने से जारी है। उन्होंने आरोप लगाया कि तीन अधिकारियों ने जनसेवक संदीप कुमार और मंजीत सिंह को नौ दिनों तक बिना जांच व उचित प्रक्रिया के अवैध हिरासत में रखकर अपनी जिम्मेदारी के प्रति कदाचार किया और सक्षम प्राधिकारी से जांच की पूर्व मंजूरी लिए बिना हथकड़ी भी लगाई।