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Haryana Assembly Election: भाजपा में घटी तो कांग्रेस में सड़क पर आई बगावत, 23 नेताओं ने ठोकी अलग ताल

Fri, 13 Sep 2024 02:01 PM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

कांग्रेस को प्रदेश की 90 विधानसभा सीटों के लिए 2500 से अधिक आवेदन प्राप्त हुए थे। ऐसे में पार्टी आलाकमान को पहले से बगावत का अंदेशा था। इसी कारण से प्रत्याशियों की सूची जारी करने में कांग्रेस लगातार देरी कर रही थी और उम्मीदवारों का एलान एक साथ न करके, छोटी-छोटी सूचियां जारी हो रही थीं।
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हरियाणा विधानसभा चुनाव - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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बगावत के डर से विधानसभा चुनाव के प्रत्याशियों की सूची को अंतिम दिन तक लटकाने वाली कांग्रेस में नाराजगी खुलकर सामने आ गई है। टिकट न मिलने के बाद कांग्रेस के अपने नेता ही उसके लिए सबसे बड़ी मुसीबत का सबब बन गए हैं। अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों के 23 बड़े और कद्दावर नेताओं ने कांग्रेस पर पक्षपात का आरोप लगाते हुए पर्चा भर दिया है। कांग्रेस के बागी नेताओं में रोहिता रेवड़ी, संपत सिंह, उपेन्द्र कौर अहलूवालिया, शारदा राठौर, ललित नागर, सतबीर रातेरा और चित्रा सरवारा जैसे बड़े नाम शामिल हैं।

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दूसरी ओर भाजपा ने अपने लगभग सभी बड़े नेताओं को मना कर अपने पाले को और मजबूत बना लिया है। पूर्व शिक्षा मंत्री रामबिलास शर्मा, शिक्षा मंत्री सीमा त्रिखा, पूर्व विधायक नरेश कौशिक, पूर्व विधायक राव बहादुर सिंह और पूर्व पार्षद लोकेश नांगरू ने पार्टी आलाकमान के प्रयासों के बाद सभी गिले-शिकवे भुला दिए हैं।

कांग्रेस में तीन माह पहले शामिल हुईं पूर्व विधायक रोहिता रेवड़ी व विजय जैन ने पानीपत ग्रामीण सीट से टिकट न मिलने पर बगावत कर दी। दोनों ने पार्टी से त्यागपत्र दे निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर नामांकन करा दिया। अंबाला सिटी से कांग्रेस प्रत्याशी निर्मल चौधरी की बेटी चित्रा सरवारा ने अंबाला कैंट से निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में पर्चा भरा है। अंबाला शहर से टिकट न मिलने पर हिम्मत सिंह व जसबीर मलोर ने आजाद प्रत्याशी के रूप में नामांकन कराया है।
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कुरुक्षेत्र से पूर्व मंत्री जसविंद्र सिंह संधू के बड़े बेटे जसतेज संधू ने कांग्रेस से बगावत कर निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में नामांकन कराया है। पूर्व मंत्री छोटे बेटे गगनजोत संधू ने इनेलो से बगावत कर निर्दलीय चुनाव लड़ने का निर्णय लिया है। जगाधरी से टिकट न मिलने पर आदर्श पाल कांग्रेस छोड़ आम आदमी पार्टी के प्रत्याशी के रूप में नामांकन कराया है।

हिसार की नलवा विधानसभा सीट से कांग्रेस से बागी होकर पूर्व वित्त मंत्री संपत सिंह ने निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर नामांकन भरा। हांसी में कांग्रेस के सबसे अधिक पांच बागियों ने नामांकन भरा। नरेश यादव, प्रेम मलिक, कर्ण सिंह बामल, सुमन शर्मा, मनोज राठी ने निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर नामांकन किया है।

फतेहाबाद से कांग्रेस का टिकट न मिलने से खफा अनिल ज्याणी ने निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर नामांकन दाखिल कर दिया है। वहीं, बाढड़ा हलके से दावेदार सोमवीर घसोला ने भी निर्दलीय पर्चा भरा है। सोनीपत से कांग्रेस से बगावत करके बरोदा विधानसभा सीट पर आजाद उम्मीदवार के रूप में डॉ. कपूर सिंह नरवाल ने पर्चा भरा है। जींद से कांग्रेस से बागी प्रदीप गिल ने निर्दलीय नामांकन पत्र दाखिल किया। नरवाना से कांग्रेस से बागी विद्या रानी दनौदा ने इनेलो के टिकट पर नामांकन पत्र दाखिल किया है। झज्जर विधानसभा सीट से संजीत कबलाना और बहादुरगढ़ से राजेश जून ने निर्दलीय
प्रत्याशी के रूप में नामांकन पत्र भरा है। रेवाड़ी जिले की कोसली सीट पर मनोज कोसलिया ने निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर नामांकन पत्र दाखिल कर दिया है। वहीं, दूसरे दावेदार केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह के छोटे भाई राव यादवेंद्र सिंह ने भी कांग्रेस से बगावती तेवर अपना लिए हैं। तिगांव से ललित नागर और बल्लभगढ़ से शारदा राठौर ने निर्दलीय पर्चा भरा है।

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भाजपा का डैमेज कंट्रोल

टिकट न मिलने पर भाजपा में बगावत कर रहे कई वरिष्ठ नेताओं ने वीरवार को विरोध का झंडा रख दिया। पूर्व शिक्षा मंत्री प्रो. रामबिलास शर्मा वीरवार सुबह तक महेंद्रगढ़ से टिकट के लिए अड़े रहे। पार्टी प्रत्याशी कंवर सिंह यादव टिकट घोषित होने के बाद वीरवार सुबह रामबिलास शर्मा को उनके सतनाली स्थित आवास पर मनाने पहुंचे। इसके बाद समर्थकों की बैठक में पूर्व शिक्षा मंत्री ने भाजपा प्रत्याशी को समर्थन देते हुए चुनाव नहीं लड़ने का एलान कर दिया। उन्होंने कहा कि वह पार्टी के फैसले का सम्मान करते हैं और पार्टी के साथ खड़े हैं। मैंने जिस झंडे के लिए जीवन समर्पित कर दिया, अब उसी के साथ रहना है।

नरेश, कैलाश, रेणु बाला ने भी छोड़ा विरोध

टिकट मिलने से पहले भाजपा की ओर से नामांकन पत्र जमा कराने वाले कैलाशचंद ने भी पार्टी के फैसले का स्वागत करते हुए प्रत्याशी को समर्थन देने की घोषणा कर दी है। बहादुरगढ़ से भाजपा के पूर्व विधायक नरेश कौशिक भी अपने छोटे भाई दिनेश कौशिक के समर्थन में उतर आए हैं। करनाल सीट से बगावत पर उतरीं पूर्व मेयर रेणू बाला गुप्ता ने अपना निर्णय बदल लिया है। वह पार्टी के साथ रहेंगी।

लेकिन भाजपा की मुश्किलें पूरी तरह दूर नहीं

हिसार में भाजपा से बागी होकर पूर्व मंत्री सावित्री जिंदल और निवर्तमान मेयर गौतम सरदाना ने निर्दलीय नामांकन किया है। सिरसा के भाजपा नेता गोबिंद कांडा ने फतेहाबाद सीट से निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर नामांकन भरा है। हालांकि नामांकन भरने गोबिंद कांडा खुद नहीं आए। उनके समर्थकों ने नामांकन-पत्र जमा किया। पूर्व विधायक तेजवीर सिंह ने कुरुक्षेत्र में कांग्रेस का दामन थाम लिया। 

चरखी दादरी में 40 साल से भाजपा से जुड़े नगर

परिषद के पूर्व चेयरमैन संजय छपारिया ने निर्दलीय नामांकन किया है। महम हलके से राधा अहलावत ने निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर नामांकन पत्र दाखिल किया है। देवेंद्र कादियान ने गन्नौर सीट से और राजीव जैन ने सोनीपत से आजाद उम्मीदवार के तौर पर नामांकन किया। नरवाना से भाजपा से बागी संतोष दनौदा ने जजपा प्रत्याशी के रूप में नामांकन पत्र दाखिल किया। झज्जर से सतबीर सिंह एडवोकेट, बेरी से भाजपा किसान मोर्चा के जिलाध्यक्ष अमित अहलावत और नारनौल से भाजपा महिला मोर्चा की जिलाध्यक्ष ने निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर नामांकन किया है। फरीदाबाद एनआईटी
से टिकट के दावेदार पूर्व विधायक नगेंद्र भड़ाना ने इनेलो के टिकट पर पर्चा भरा है।

आप भी नहीं अछूती

रोहतक शहर से टिकट न मिलने से नाराज आम आदमी पार्टी के प्रदेश सचिव लवलीन टुटेजा ने पार्टी छोड़ दी है। वीरवार को वे पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के आवास पर पहुंचकर प्रत्याशी व मौजूदा विधायक भारत भूषण बतरा की मौजूदगी में कांग्रेस में शामिल हो गए।
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