हाउसिंग बोर्ड हरियाणा की ओर से पिछले वर्षों के दौरान जिलेभर में 6821 मकान अलॉट किए गए, लेकिन इन मकानों के मालिकों के नाम और कैटेगरी का पूरा ब्योरा नहीं है।
नतीजतन, एक के बाद एक मकानों की रीसेल हो रही है, लेकिन सरकार को ट्रांसफर टैक्स तक नहीं मिल रहा है। कुछ मकान तो ऐसे हैं कि मकान किसी के नाम से है और बिजली-पानी का मीटर किसी और के नाम से। यह खुलासा आरटीआई के तहत मांगी गई जानकारी में हुआ है।
आरटीआई कार्यकर्ता राजीव सचदेवा ने पांच सितंबर 2013 को हाउसिंग बोर्ड हरियाणा से आरटीआई के जरिए हाउसिंग बोर्ड के मकानों से संबंधित ब्योरा मांगा था।
जवाब में आवंटित मकानों की संख्या 6821 बताई गई, लेकिन इनके मालिक कौन हैं, उन सभी की सूचना मुहैया नहीं कराई जा सकी।
मकान मालिकों को भेजेंगे नोटिस
विभागीय अधिकारियों के मुताबिक, दस्तावेज कंप्यूटराइज्ड नहीं हैं और बिके मकानों के ट्रांसफर कराने के लिए भी लोग नहीं आए। ऐसे मकान मालिकों को अब नोटिस भेजा जाएगा।
आरटीआई में यह भी जानकारी मांगी गई कि इन मकानों को किराए पर देने का प्रावधान है या नहीं। जवाब मिला, बगैर इजाजत ऐसा नहीं किया जा सकता है।
इसके अलावा ट्रांसफर मनी के मद में हुए नुकसान और इसके लिए जिम्मेवार अधिकारियों या कर्मियों पर कार्रवाई नहीं होने का जवाब ‘नॉट अवेलेबल या अधूरी जानकारी’ दिया गया।
क्या है ट्रांसफर मनी
ईडब्ल्यूएस फ्लैट 1100
एलआईजी फ्लैट 3200
एमआईजी फ्लैट 10500
दस लाख तक के प्लॉट 10 हजार
इसके बाद प्रति दस लाख छह फीसदी अतिरिक्त
ट्रांसफर नहीं कराए जाने की वजह से मकानों का वारिस कौन है, इसका कोई पता नहीं है। बगैर मकान मालिकों के उचित डिटेल्स के बावजूद किराए पर मकान दिए जा रहे हैं और हजारों की संख्या में मकान बेच चुके लोगों की वजह से बोर्ड को भी करोड़ों का नुकसान हुआ है।
राजीव सचदेवा, आरटीआई कार्यकर्ता
जितनी जानकारियां उपलब्ध थीं, मुहैया कराई गईं। फिर भी कोई कमी रह गई तो इसके लिए अपील की जा सकती है।
एसपी रंगा, इस्टेट मैनेजर, हाउसिंग बोर्ड, हरियाणा