सेल इम्युनिटी का महत्वपूर्ण रोल
विशेषज्ञों का कहना है कि मरीजों की एंटीबॉडीज जांच के परिणाम से यह बात सामने आई कि संक्रमण से बचाव में खून में पाई जाने वाली एंटीबॉडीज का भले ही कोई रोल न हो, लेकिन सेल इम्युनिटी बेहद महत्वपूर्ण है। इसका कारण यह है कि सेल में पाई जाने वाली रोग प्रतिरोधक क्षमता ने उन पॉजिटिव मरीजों को दोबारा संक्रमित होने से बचाया, लेकिन इस सेल इम्युनिटी की क्षमता के बारे में अब तक कोई शोध नहीं किया गया है।
टीकाकरण में एंटीबॉडीज के रोल को बताया जा रहा बेहद खास
कोरोना से बचाव के लिए होने वाले टीकाकरण में एंटीबॉडीज के रोल को बेहद खास बताया जा रहा है। देशभर में किए जा रहे ह्यूमन ट्रायल में भी ऐसे लोगों को शामिल किया गया है जो पॉजिटिव नहीं है। ऐसी स्थिति में एक तरफ एंटीबॉडीज की बात की जा रही है जो पॉजिटिव होने के बाद बॉडी में डेवलप होता है। वहीं दूसरी तरफ ट्रायल में शामिल लोगों के संक्रमण रहित होने से दोनों बातें अलग-अलग दिशा में जा रही हैं।
ऐसे में इस शोध में वैक्सीन को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। शोध में शामिल विशेषज्ञों का कहना है कि परिणाम के आधार पर यह तो तय है कि कोरोना से बचाव में एंटीबॉडीज का रोल खास नहीं है। ऐसी स्थिति में जिस वैक्सीन को देकर कोरोना से बचाव की बात की जा रही है, वह कितने दिनों तक शरीर में एंटीबॉडीज के बल पर संक्रमण से बचाव कर पाएगा या भी शोध का विषय है।
इस शोध से इस बात की पुष्टि हुई है कि भारतीयों के शरीर में एंटीबॉडीज 50 दिनों तक ही रहता है। अलग-अलग लोगों में इसकी समय सीमा अलग हो सकती है। लेकिन अवधि 50 दिन से ज्यादा नहीं हो सकती। शोध के परिणाम से यह बात सामने आई है कि कोरोना से बचाव में एंटी बॉडीज का महत्वपूर्ण रोल नहीं है। सेल इम्युनिटी बचाव में मददगार साबित हो रही है, लेकिन इस पर पुष्ट रिसर्च नहीं हुआ है। - डॉ. तरुणदीप, असिस्टेंट प्रोफेसर, पीजीआई कम्युनिटी मेडिसिन