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देश में अब भगवान राम और भगवान वाल्मीकि पर रिसर्च, खुलने जा रहा शोध केंद्र

Thu, 11 May 2017 03:04 PM IST
रमेश शुक्ला सफर/अमर उजाला, अमृतसर(पंजाब)
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भगवान विष्‍णु
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देश में अब भगवान राम और भगवान वाल्मीकि पर रिसर्च की जाएगी। इसके लिए रिसर्च सेंटर खुलने जा रहा है, मौखिक मंजूरी मिल गई है। पंजाब सरकार ने श्री रामतीर्थ पर भगवान वाल्मीकि रिसर्च पोस्ट ग्रेजुएट कॉलेज व रिसर्च सेंटर बनाने का विचार कर रही है। मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने इस प्रोजेक्ट को मौखिक मंजूरी दे दी है, हालांकि दस्तावेजों पर हस्ताक्षर होने अभी बाकी हैं।
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मुख्यमंत्री बनने के बाद पहली बार भगवान वाल्मीकि तीर्थ पहुंचे कैप्टन अमरिंदर सिंह के सामने यह प्रस्ताव विधायक डॉ. राजकुमार वेरका रखा था। डॉ. वेरका कहते हैं कि अमृतसर गुरु नगरी है। इतिहास कहता है कि भगवान श्रीराम ने जब देवी सीता का त्याग किया था, तब देवी सीता अयोध्या से श्री रामतीर्थ आ गई थीं। यहीं पर सीता की रसोईं आज भी है और भगवान वाल्मीकि का स्थल भी।

ऐसे में रिसर्च सेंटर खुलने के बाद देश-विदेश से स्टूडेंट्स भगवान वाल्मीकि और भगवन राम के जीवन पर यहां रिसर्च कर सकेंगे। डॉक्टर वरेका ने मुख्यमंत्री से दलितों की परेशानियों और हालात को जानने और उनकी रक्षा के लिए कमीशन भी बनाने की अपील की है, जिस पर सीएम ने मंजूरी दे दी है।
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लव-कुश पर भी होगी रिसर्च

भगवान विष्‍णु
कहा जाता है कि सीता मां एक दिन भगवान वाल्मीकि के पास लव को छोड़कर किसी काम के लिए गई थीं। लौटीं तो देखा लव वहां नहीं थे। भगवान वाल्मीकि ने उसी वक्त कुश नाम की घास हाथ में लेकर लव की तरह कुश बना दिया। लव और कुश के नाम से लाहौर व कसूर शहर भी बाद में बसाया गया।

इतिहासकार सुरिंदर कोछड़ कहते हैं कि भगवान हनुमान ने ढाई फावड़ा में श्री रामतीर्थ का पवित्र सरोवर खोदा था, जहां स्नान करने पर निसंतानों को औलाद मिलती है। मान्यता है कि अमृतसर के श्री दुर्गयाणा मंदिर में पीपल के पेड़ के नीचे भगवान श्री हनुमान को लवकुश ने बांध दिया था। जहां आज प्राचीन हनुमान मंदिर में नवरात्र पर लंगूर मेला लगता है। मन्नत मांगने वाले बच्चे लंगूर बनकर आते हैं।
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