200 गांवों के लाखों लोग बूंद-बूंद पानी को मोहताज हैं। मजबूर होकर लोगों ने अब पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। डिस्ट्रिक्ट लीगल सर्विस अथॉरिटी 80 गांवों को डार्क जोन घोषित कर चुकी है, लेकिन अभी तक सरकार ने लोगों के लिए कुछ नहीं किया।
बच्चों को एक दिन छोड़कर स्कूल भेजा जाता है ताकि वे टैंकर से पानी ला सकें। सिंचाई विभाग ने डीसी को जो रिपोर्ट सौंपी है, उसके अनुसार 103 गांवों में मौजूद 145 तालाब सूख चुके हैं। जनहित याचिका दाखिल करते हुए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट से पीने का स्वच्छ जल उपलब्ध करवाने के निर्देश जारी करने की अपील की गई है।
याचिका पर संभवत: शुक्रवार को सुनवाई होगी। मेवात के गांव बिशरू निवासी तौसिफ खान ने एडवोकेट फारूख अब्दुल्ला व एडवोकेट अफज़ल हुसैन के माध्यम से मेवात के 200 गांवों में स्वच्छ पीने का पानी उपलब्ध करवाने के लिए सरकार को निर्देश जारी करने की अपील की है।
गांवों में साफ पीने का पानी मौजूद नहीं
गर्मी में पानी पीकर प्यास बुझाता एक युवक।
याची ने कहा कि इन गांवों में साफ पीने का पानी मौजूद नहीं है। यहां पानी का स्तर बेहद नीचे जा चुका है और नीचे मौजूद खतरनाक केमिकल के पानी से मिलने की आशंका बनी रहती है, जो लोगों केलिए जानलेवा हो सकता है। केमिकल वेस्ट का सबसे बड़ा कारण क्षेत्र में बड़ी संख्या में मौजूद फैक्टरियां हैं।
आगरा नहर देश की कृषि के लिए बेहद अहम है यह ओखला बैराज से शुरू होती है, जिसे 1874 में आरंभ किया गया था। पहले इसे सभी काम केलिए इस्तेमाल किया जाता था परंतु 1904 के बाद में इसको केवल खेती के लिए सीमित कर दिया गया। हरियाणा सरकार ने अपने सिंचाई साधनों को मैनेज नहीं किया, जिसके चलते अभी लोगों के सामने समस्या आ खड़ी हुई है।
मेवात कैनाल प्रोजेक्ट अभी तक लंबित
Haryana CM Manohar lal khattar
- फोटो : अमर उजाला
करोड़ों का मेवात कैनाल प्रोजेक्ट अभी तक लंबित पड़ा हुआ है। प्लानिंग कमिशन ने माना है कि यह प्रोजेक्ट 300 से अधिक गांवों की 250000 एकड़ भूमि को सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध करवा सकता है। समय पर इन प्रोजेक्ट का पूरा होना लोगों के लिए राहत की खबर लाएगा। जमीन का पानी नीचे जा रहा है और बहुत कम लोगों के पास ट्यूबवेल है।
यहां पर फसलों का उत्पादन प्रति हेक्टेयर अन्य जिलों की तुलना में बेहद कम है। दशकों से कोटला लेक को पुनर्जीवित करने का वादा किया जा रहा है। खट्टर सरकार ने 17 करोड़ पहले फेज पर खर्च कर 23000 एकड़ भूमि को सिंचाई लाभ होने की बात कही है परंतु मेवात विकास मंच ने कहा कि इससे पीने के पानी की समस्या हल नहीं हो रही है।