सूर्य की अनंत ऊर्जा को सीधे लेजर शक्ति में बदलने की दिशा में इंस्टीट्यूट ऑफ माइक्रोवेव टेक्नोलॉजी (इमटेक-सीएसआईओ) के वैज्ञानिकों ने बड़ी सफलता हासिल की है। वैज्ञानिकों की यह खोज अंतरिक्ष मिशनों के लिए गेम चेंजर साबित हो सकती है।
कम वजन, कम लागत और उच्च दक्षता वाला यह सिस्टम अंतरिक्ष में लंबे समय तक चलने वाले मिशनों के लिए विशेष रूप से उपयोगी माना जा रहा है। वैज्ञानिकों का कहना है कि इस तकनीक से अंतरिक्ष अभियानों की लागत घटेगी और मिशनों की अवधि बढ़ाई जा सकेगी। इस महत्वपूर्ण शोध को अंतरराष्ट्रीय जर्नल ऑफ ऑप्टिक्स में प्रकाशित किया गया है।
इस प्रोजेक्ट का नेतृत्व डॉ. सोनम बैरवाल ने किया। उनके साथ डॉ. भरपूर सिंह, डॉ. विपेंदर नेगी और प्रो. ह्युकमो कांग (एरिजोना विश्वविद्यालय) सहित अन्य विशेषज्ञ जुड़े रहे। शोध में ऐसे उन्नत सोलर कंसन्ट्रेटर डिजाइन पर काम किया गया है जो बिना किसी रुकावट सूर्य की रोशनी को केंद्रित कर सकते हैं। शोधकर्ताओं ने बताया कि इसके लिए 99 मिमी व्यास का एक ऑफ-एक्सिस पैराबोलिक मिरर तैयार किया जो अकेले ही सूर्य ऊर्जा को 8.0 वॉट तक केंद्रित करने में सक्षम पाया गया।
सूरज की रोशनी से सीधे ताकतवर ऊर्जा - यह तकनीक सूरज की रोशनी को इकट्ठा करके सीधे एक बिंदु पर केंद्रित करती है, जिससे बिना ईंधन या बिजली के लेजर जैसी उच्च ऊर्जा प्राप्त होती है।
कम खर्च, ज्यादा फायदा - इसमें बहुत बड़े और महंगे दर्पण बनाने की जरूरत नहीं पड़ती। छोटी सेकेंडरी मिरर से ही सारी खामियां ठीक हो जाती हैं, जिससे लागत काफी कम हो जाती है।
ऊर्जा की बर्बादी नहीं- पारंपरिक सिस्टम में बीच में रुकावट आ जाती है लेकिन यह नया ऑफ-एक्सिस डिजाइन बिना किसी रुकावट के पूरी धूप का उपयोग करता है।