‘कोरोना काल से शोध प्रभावित, यह समय जीरो घोषित हो’
पीयू में 700 से अधिक हैं शोधार्थी, अधिकांश बोले- फील्ड में नहीं जा सके
प्रयोगशालाओं में नहीं जाने के चलते जरूरी कार्य भी नहीं हो पाया
माई सिटी रिपोर्टर
चंडीगढ़। कोरोना काल ने शोध को भी काफी प्रभावित किया। शोधार्थियों के कदम रोकने की पूरी कोशिश की। इसके कारण शोध का कुल समय कम हो गया जबकि कार्य कुछ किया ही नहीं। इसने शोधार्थियों को परेशानी में डाल दिया। अब शोधार्थी चाहते हैं कि लॉकडाउन का काल जीरो घोषित हो ताकि वे समय पर अपने शोध जमा कर सकें। पीयू से उन्होंने कई बार कहा, लेकिन किसी ने बात नहीं सुनी। हालांकि पिछले साल जीरो समय किया गया था, लेकिन इस बार इसे लेकर निर्णय नहीं लिया गया।
पीयू में 700 से अधिक शोधार्थी हैं। हर शोध का कार्य समय से जुड़ा होता है। शोध शुरू करने से पहले शोधार्थियों को एक थीसिस जमा करनी पड़ती है, जिसमें साफ लिखा होता है कि वे इस कार्य को कितने दिन में पूरा कर देंगे। कार्य तय समय पर पूरा नहीं होता है तो विद्यार्थियों को एक्सटेंशन मिलती है। अब कोरोना बीच में आने के कारण कई शोधार्थियों का समय शोध में कम हो गया। इसी समय को वे जीरो करवाना चाहते हैं।
फोटो---
शोध में न जोड़ा जाए कोरोना काल
कोरोना काल का समय शोध के समय के साथ नहीं जोड़ा जाना चाहिए। जब छात्रों के शोध के समय में बढ़ोतरी होगी तो उन्हें लाभ मिलेगा और परिणाम भी बेहतर आएंगे। -जसविंदर, शोधार्थी, जंतु विज्ञान विभाग
फोटो-
कोरोना काल जीरो सेशन हो
कोरोना ने शोध को पूरी तरह प्रभावित किया। लॉकडाउन के कारण शोध के लिए बाहर नहीं जा पाए। फील्ड वर्क व प्रयोगशाला में पहुंचना जरूरी था, इसलिए कोरोना काल को जीरो सेशन में जोड़ा जाए। -निशांत रतन, शोधार्थी, कानून विभाग
फोटो-
कोरोना के कारण विद्यार्थी पहले ही परेशानी में हैं। पीयू उनकी परेशानी कम करने के बजाय बढ़ा रही है। कोरोना काल में जब शोध हुआ ही नहीं तो उस समय को शोध के समय के साथ नहीं जोड़ा जाना चाहिए। -नरिंदर पाल, शोधार्थी, इतिहास विभाग