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पंजाब सरकार को हाईकोर्ट की फटकार, कहा-क्यों नहीं बंद कर देते मार्कफेड

Tue, 10 May 2016 05:43 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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कोर्ट - फोटो : file photo
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फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) को सही तरीके से लागू करने और कुछ फसलों की खरीद नहीं होने के विरोध में भारतीय किसान यूनियन की ओर से दायर याचिका पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के जस्टिस एसएस सारों व जस्टिस गुरमीत राम की डिवीजन बेंच ने पंजाब सरकार को कड़ी फटकार लगाई है। बेंच ने अगली सुनवाई पर यह बताने को कहा है कि आखिर मक्की और सूरजमुखी की फसल क्यों नहीं खरीदी जाती।
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दरअसल, भाकियू ने याचिका में कहा था कि पंजाब में मक्की और सूरजमुखी की अच्छी फसल होती है, लेकिन न तो इसका एमएसपी निर्धारित है और न ही इसका मंडीकरण होता है। यह भी बताया था कि पंजाब सरकार इसे घाटे का सौदा बताते हुए कह रही है कि मक्की की मांग नहीं है, ऐसे में मंडीकरण नहीं हो सकता। याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट को बताया था कि केंद्र सरकार वर्ष 2010 में ही पंजाब सरकार को पत्र भेजकर लिख चुकी है कि मक्की और सूरजमुखी की फसल की खरीद करे और यदि कोई घाटा होता है तो यह घाटा केंद्र सरकार वहन करेगी। इस पत्र के साथ ही दोनों फसलों पर पंजाब सरकार से सहमति मांगी गई थी।

सोमवार को सुनवाई के दौरान भाकियू केवकील जेएस तूर ने बेंच को बताया कि अभी तक पंजाब सरकार ने सहमति नहीं भेजी है। इसी पर फटकार लगाते हुए बेंच ने पूछा कि जब केंद्र सरकार घाटा वहन करने को तैयार है तो मक्की व सूरजमुखी की खरीद क्यों नहीं की जाती, यदि ऐसा नहीं किया जा सकता तो मार्कफेड को बंद कर देना चाहिए। अगली सुनवाई पर पंजाब सरकार को जवाब देना होगा कि क्या वह यह दोनों फसलें खरीदने के लिए तैयार है या नहीं।
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धर, हरियाणा सरकार ने हाईकोर्ट में कहा था कि वह सूरजमुखी व बाजरे की शत-प्रतिशत फसल खरीदने को तैयार है, लेकिन याचिकाकर्ता ने बताया कि केवल 25 फीसदी फसल ही खरीदी जा रही है। इस पर हरियाणा सरकार को स्थिति स्पष्ट करने को कहा है कि वह पूरी फसल खरीदेगी या केवल 25 प्रतिशत।

पंजाब-हरियाणा बैठक कर नीति लागू करें
फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के हिसाब से किसानों को भुगतान के लिए पंजाब और हरियाणा में ठोस नीति बनाने का निर्देश देने संबंधी एक जजमेंट का हवाला भाकियू ने सोमवार को दे दिया है। इस पर सहमति जताते हुए डिवीजन बेंच ने सरकारों को मीटिंग करके नीति लागू करने का निर्देश दे दिया है। पिछली सुनवाई पर बेंच ने कहा था कि नीति निर्धारण का निर्देश देने के लिए बेंच तैयार है, लेकिन इसके लिए किसान यूनियन कोई फैसला पेश करे, जिससे हाईकोर्ट ऐसा निर्देश दे सके।   यूनियन के वकील जेएस तूर ने एक फैसले का हवाला भी दिया था, लेकिन बेंच ने कहा कि यह फैसला एमएसपी निर्धारित करने संबंधी है और एमएसपी केंद्र सरकार निर्धारित करती है, जबकि एमएसपी के हिसाब से किसानों को भुगतान के लिए राज्य सरकारें नीति निर्धारित करती हैं। ऐसे में बेंच ने नीति निर्धारित करने संबंधी किसी जजमेंट का हवाला देने का निर्देश यूनियन को दिया था और ऐसी जजमेंट सोमवार को पेश की गई।
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