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ग्राउंड रिपोर्ट: नशे में डूबती पंजाब की युवा पीढ़ी का सच

Thu, 09 Jun 2016 11:06 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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नशे में जिंदगी बर्बाद करते यूवा पीढ़ी - फोटो : demo pics
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हंसता-खेलता पंजाब...देश में अन्न का कटोरा...हरित क्रांति का नायक। यही रही है इस सूबे की पहचान। मगर अब तस्वीर सिर्फ खुशहाली की नहीं है। कर्ज से दम तोड़ते किसानों और नशे में जिंदगी बर्बाद करते युवाओं की खबरें रोज इस प्रदेश से आती हैं। यह अलग बात है कि सरकार और उसके नुमाइंदे कहते हैं कि पंजाब में नशे की समस्या नहीं है, यह प्रदेश को बदनाम करने की साजिश है।
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दूसरी ओर विपक्ष सरकार पर सच से मुंह फेरने और नशे को बढ़ावा देने के आरोप लगा रहा है। नशे में डूबती पंजाब की युवा पीढ़ी की चिंता यहां की फिल्मों और गीतों में भी साफ झलकती है। दारू दूरू पींदा होवे चल जऊ, चिट्टे तों परहेज चाहिदा जैसे गीत गूंज रहे हैं। फिल्मों और गीतों को आप सेंसर कर सकते हैं मगर सच को सेंसर करना मुश्किल है। सच वही है, जो छुपाए नहीं छुपता। सच तो लोक गीत बनकर गली गली गूंजने लगता है। नशे ने पंजाब की क्या हालत कर दी है, इसी पर केंद्रित है अमर उजाला टीम की अनसेंसर्ड ग्राउंड रिपोर्ट...  

फिरोजपुर और फाजिल्का जिले में नशे की लत से कई परिवार बर्बाद

नशे में जिंदगी बर्बाद करती यूवा पीढ़ी - फोटो : demo pics
फिरोजपुर और फाजिल्का जिले में नशे की लत से कई परिवार बर्बाद हुए हैं। इस साल छह माह में पाकिस्तान से आई 150 किलो हेरोइन पकड़ी जा चुकी है। सरहद पार और राजिस्थान से हेरोइन, अफीम, चूरापोस्त, स्मैक और चरस पंजाब में आती है। पंजाब के अधिकांश ग्रामीण अफीम और चूरापोस्त का नशा करते हैं। यहां तक कि चूरापोस्त चाय में डालकर पीते हैं। यह ट्रेंड टीनएजर में काफी तेजी से बढ़ा है। पुलिस रिकार्ड के मुताबिक फिरोजपुर व फाजिल्का में छह माह में लगभग 235 चूरापोस्त, स्मैक, हेरोइन, अफीम व शराब के मामले दर्ज हैं। 

नशे की लत ने ली छोटे भाई की जान फिरोजपुर निवासी राजू ने बताया कि उसके छोटे भाई बुगन को स्मैक की लत लग गई। वह अफीम व चूरापोस्त भी लेता था।  लगातार नशा करने से उसकी और घर की हालत बिगड़ती गई। उसीके गम में मां की मौत हो गई। लड़ाई झगड़े के मामले में बुगन जेल चला गया। वहां उसकी मौत हो गई।

गांव महालम को नशे ने किया बदनाम उपमुख्यमंत्री सुखबीर बादल के हलके जलालाबाद के गांव महालम का नाम नशे की वजह से बदनाम है। पुलिस ने कई बार यहां से नशीले पदार्थ बरामद किए हैं। शराब के टैंकर और टंकियां यहां से बरामद हुई हैं। कुछ महिलाओं पर भी नशा बेचने के मामले दर्ज हैं। इस गांव में पुलिस भी आसानी से घुसने की हिम्मत नहीं करती, जब कार्रवाई करनी है तो 400 से 500 पुलिस कर्मियों की टीम छापा मारती है। सांसद शेर सिंह घुबाया भी जलालाबाद के ही रहने वाले हैं।

 कई घर हुए बर्बाद राजू चराया, प्रधान, नर सेवा नारायण सेवा समिति, फिरोजपुर ने बताया कि नशे के कारण कई परिवार बर्बाद हुए हैं। अपने बच्चों को नशे की लत छुड़वाने के लिए अभिभावक घर का सब कुछ बेच चुके हैं लेकिन नशा नहीं छूट पाया। पंजाब में इन दिनों हेरोइन, अफीम, चूरापोस्त व स्मैक का नशा बिक रहा है। पाकिस्तान से हेरोइन आ रही है। जिसे बीएसएफ व पंजाब पुलिस रोकने में असमर्थ है। पंजाब को नशा मुक्त न किया तो युवा बर्बाद हो जाएंगे। अधिकांश लोग चूरापोस्त व अफीम का नशा कर रहे हैं।

हंसते खेलते परिवार को निगल गया नशा

नशे में जिंदगी बर्बाद करती यूवा पीढ़ी - फोटो : demo pics
कपूरथला के मोहल्ला नेचेबंदा के एक परिवार को नशा पूरी तरह निगल गया। दादा-पिता व चाचा लाहन (देसी शराब) पीकर इस दुनिया से चले गए। वहीं अगली पीढ़ी ड्रग्स की चपेट में आ गई। घर की जिम्मेदारी अब महिलाओं के कंधों पर है। घर की मुखिया महिला परिवार का पेट पाल रही है। बेटी मां का हाथ बंटा रही है। घर का चिराग ड्रग्स की जद में है। परिवार इस मुद्दे पर कुछ भी बोलने को तैयार नहीं है। 

नेताओं के नाम से मिलता है नशा नेताओं के नाम से यहां नशे की खेप का कोड नेम रखा जाता है। भुक्की जैसे नशे का नाम किसी छोटे नेता पर हेरोइन जैसे नशे का नाम किसी बड़े नेता के नाम पर रखकर खेप भेजी जाती है। 

चौल, मलाई, खोया व स्वर्ग नाम से बिकता है नशा नशा करने वाले डोडे को चौल, चिट्टा को मलाई, खोया, स्वर्ग और अफीम को नागिनी के नाम से पुकारते हैं। नशा बेचने वाले इन नामों को सुनते ही मांगने वाले को नशा मुहैया करवाते हैं।

यह क्षेत्र और गांव हैं कुख्यात कपूरथला के मेहताबगढ़, उच्चाधोड़ा, शेेखूपुर कालोनी, गांव बूट, गांव लोटियांवाल व गांव तोती में नशे का कारोबार खूब फल फूल रहा है। डा. अंबेडकर मिशन सोसाइटी के अध्यक्ष गुरमुख सिंह ढोड के अनुसार कपूरथला के गली मोहल्लों में भी नशा खुलेआम बिकता है।

नशा छुड़ाओ केंद्र में पहुंचे 8000 मरीज मेंटल हेल्थ व ड्रग डी-एडिक्शन सेंटर के नोडल अफसर व मनोचिकित्सक डा. संदीप भोला ने बताया कि नशा छुड़ाओ केंद्र में 2007 से अब तक 8000 लोग नशे से निजात पाने के लिए पहुंचे हैं। इस समय कपूरथला नशा छुड़ाओं केंद्र में 28, पुनर्वास केंद्र में 10, फगवाड़ा में 12 मरीज हैं। 

909 एफआईआर और 1099 गिरफ्तारियां जिला पुलिस ने साल 2015-16 में नशा तस्करों के खिलाफ विशेष मुहिम के तहत जिले के 15 थानों में 909 एफआईआर दर्ज करके 1099 आरोपियों को सलाखों के पीछे पहुंचाया है। साल 2015 में पुलिस ने 722 एफआईआर दर्ज करके 848 आरोपियों को गिरफ्तार किया। इनसे पुलिस ने 4 किलो 916 ग्राम हेरोइन, 43 किलो 355 ग्राम नशीला पाउडर, 1159 किलो 350 ग्राम डोडे चूरा पोस्त, 5895 नशीला गोलियां, 2074 कैप्सूल, 2 किलो 30 ग्राम स्मैक, 9 किलो 623 ग्राम अफीम, 623.05 ग्राम चरस बरामद की है। 2016 के अप्रैल व मई दो माह में ही 187 केस रजिस्टर्ड करके 251आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। इनसे पुलिस ने 2 किलो 673 ग्राम हेरोइन, 9 किलो 936 ग्राम नशीला पाउडर, 77 किलो 500 ग्राम डोडे चूरा पोस्त, 9391 नशीली गोलियां, 2578 कैप्सूल, 415 ग्राम स्मैक, 13 किलो 860 ग्राम अफीम, नशीले इंजेक्शन 59, अवैध शराब 56250 मिली बरामद की है। रिपोर्ट: महेश कुमार

मालवा में नशे की मंडी के तौर पर मशहूर है सांसी बस्ती

नशे में जिंदगी बर्बाद करती यूवा पीढ़ी - फोटो : demo pics
बरनाला की सांसी बस्ती कई साल से मालवा क्षेत्र में नशा मंडी के तौर पर मशहूर है। नशा बेचने के मामले यहां के पुरुषों ही नहीं महिलाओं पर भी दर्ज हैं।  पहले इस बस्ती में भुक्की और चूरा पोस्त ही बिकता था। उसके बाद अफीम और अब तो यहां स्मैक और चरस की पुड़ियां भी बिकती हैं। सुबह से ही महिलाएं नशा लेकर विभिन्न ठिकानों पर खड़ी हो जाती हैं। इनसे नशा खरीदने वालों में ग्रामीण युवाओं की संख्या ज्यादा होती है।

बरनाला के पूर्व पार्षद हरप्रीत लंबू के अनुसार पुलिस अधिकारियों की इस बस्ती पर नजर रखने की ड्यूटी लगाई जाती है, अगर वे ड्यूटी ईमानदारी से निभाएं तो यह नशा मंडी बंद हो सकती है। कई पुलिस वालों के लड़के भी नशे की लत में फंस चुके हैं। ये लोग स्मैक की पुड़िया, चरस की पुड़िया, भुक्की, चूरा पोस्त, अफीम के साथ साथ मेडिकल नशे की किट भी बेचते हैं। एक किट में नशीले कैप्सूल, गोलियां व सिरिप होता है। ऐसी किट 500 से 1000 हजार रुपये तक बेची जाती है। 
 
 गुरप्रीत सिंह तूर, पुलिस मुखी, बरनाला ने बताया कि इस सांसी बस्ती में रहने वाले ज्यादातर पुरुष और महिलाओं पर नशा तस्करी के मामले दर्ज हैं। अब इन पर लगातार नजर रखी जा रही है और बस्ती में नशे की तस्करी करने वालों को पकड़ने के लिए सादे कपड़ों में भी पुलिस मुलाजिम तैनात किए गए हैं। बस्ती में रहते लोगों की समय समय पर काउंसिलिंग की जाती है। अब यहां के लोग नशे का धंधा छोड़कर विभिन्न कार्य करने लगे हैं।

12 से 80 साल तक के लोग नशे की गिरफ्त में
गुरदासपुर में नशा इस कदर फैला कि बच्चों से ले कर बुजुर्ग तक इसकी चपेट में हैं। रेडक्रास डी-अडिक्शन सेंटर के प्रोजैक्ट डायरेक्टर रोमेश महाजन के अनुसार केंद्र में अभी तक 33950 मरीज इलाज के लिए आ चुके हैं। इनमें बच्चे, बूढ़े और लड़कियां भी शामिल हैं। महाजन के अनुसार गांव गिल मंज का गुरमीत सिंह अपनी जमीन बेच कर साठ लाख की हेरोइन पी गया। इसी गम में उसके मां-बाप चल बसे। उसके मौसा ने उसका इलाज कराया और उसे विदेश भेज दिया ।

इसी तरह मंदीप सिंह कोलंबिया से पंजाब आया और यहां उसे हेरोइन की लत लग गई। वह रोज दस हजार रुपये की हेरोइन पीने लगा । इसकी भनक जब मंदीप की पत्नी को लगी तो उसने इंटरनेट से सेंटर की जानकारी हासिल की और मंदीप का इलाज करवाया। अब दोनो सुखद जीवन बिता रहे हैं। 
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मोटे मुनाफे के चक्कर में नेताओं और पुलिस का गठजोड़

नशे में जिंदगी बर्बाद करती यूवा पीढ़ी - फोटो : demo pics
हरित क्रांति का पुरोधा पंजाब अब नशे के दलदल में फंसता जा रहा है। अफीम और भुक्की से शुरू हुआ यह सिलसिला भुक्की, स्मैक, हेरोइन से होते हुए सिंथेटिक ड्रग तक पहुंच चुका है। मोटे मुनाफे के चक्कर में नेताओं और पुलिस का गठजोड़ युवाओं को इस दलदल में खींच रहा है। अफगानिस्तान से पाकिस्तान और फिर पंजाब से कनाडा व अमेरिका तक हेरोइन पहुंचाने में कई नामवर लोग बदनाम हो चुके हैं। साथ ही नार्को टेरेरिज्म का एक नया खतरा मुंह खोले खड़ा है। 

चपेट में शिक्षित युवा नार्को टेरिरिज्म के निशाने पर पंजाब के शिक्षित युवा हैं। नवांशहर का एक युवक, सिविल इंजीनियरिंग करने के बाद उसे एक यूनिवर्सिटी में बतौर सहायक प्रोफेसर रखा गया। विदेशी नागरिकों के संपर्क में आकर वह हेरोइन का आदी हो गया। इसके बाद उसकी नौकरी चली गई, इन दिनों उक्त सहायक प्रोफेसर अपना इलाज नशा छुड़ाओ केंद्र से करवा रहा है। सिर्फ एक युवक ही नहीं पंजाब के कई ऐसे पढ़े लिखे युवाओं की कहानी है, जो नशे का शिकार होकर अपना कैरियर खराब कर चुके हैं। 2009 में हाईकोर्ट को दी गई  जानकारी के मुताबिक पंजाब के गांवों में 67 फीसदी लोग कभी न कभी ड्रग एडिक्ट रहे हैं।

गांव बिलगा : 800 युवा दलदल में, 90 की मौत सूबे का गांव  बिलगा अपने क्षेत्रफल या आबादी के कारण नहीं बल्कि नशे को लेकर बदनाम  हो चुका है। इस गांव में नशे के सौदागरों ने दो-तीन लड़कियों को आगे कर नशे का जाल फैलाया है। इसकी चपेट में गांव के लगभग 800 नौजवान आ चुके हैं और 90 युवा मौत की नींद सो चुके हैं। गांव का एक युवक जिंदगी और मौत के बीच जंग लड़ रहा है।

उसने खुद को नशे  का टीका लगा लिया, जिससे उसको लकवा हो गया। गांव बिलगा के आसपास छोटे बड़े 35 गांव हैं। गांव बिलगा की आबादी  15 हजार के आसपास है। कोई गांव ऐसा नहीं है, जहां पर नशे से किसी की मौत न हुई हो। किसी घर में बाप और बेटा  दोनों नशे की लत से मर गए तो किसी ने नशे में धुत होकर फंदा लगा लिया। यही नहीं हाल ही में चली ड्रग के खिलाफ मुहिम में यह भी खुलासा हुआ कि बिलगा की कई लड़कियां नशे का शिकार हो चुकी हैं। पुलिस ने कुछ लड़कियों को हिरासत में भी लिया, लेकिन बाद में उनको छोड़ दिया गया। 

बिलगा  निवासी  संतोख सिंह संधू और परमलाल का कहना है कि वे दो साल से लगातार चीख रहे हैं हम, हमारी सुनो हमारा बिलगा नशे की मंडी बनता जा रहा है। प्रशासन के कानों पर कोई असर नहीं हुआ। बिलगा में कुछ साल पहले कोई नशा नहीं था। गांव के मेन बाजार में एक नेता ने अपने-अपने रिश्तेदारों को आगे कर मनियारी की दुकान खुलवा दी। इसमें लड़कियों को काम पर रख लिया। दुकान में मनियारी का सामान तो बिका नहीं, उन लड़कियों ने जमकर नशीला पाउडर, हेरोइन व स्मैक बेची। 

शिअद नेता समेत कई वर्दीधारी हो चुके हैं गिरफ्तार पंजाब में ड्रग तस्करी में मोटा मुनाफा देखकर पंजाब के जहां कई पुलिस मुलाजिम और अधिकारी ड्रग कारोबार से जुड़ गए। वहीं शिअद के नेता हैप्पी सोंधी तक को राजासांसी एयरपोर्ट के पास ही डीआरआई ने 8 किलो हेरोइन समेत गिरफ्तार किया था। हाल ही में बार्डर के अजनाला जिले से एएसआई रंजीत सिंह को ड्रग तस्करी में काबू किया गया। आईजी परमराज उमारनंगल तक ईडी के जांच के दायरे में चल रहे हैं। एक मंत्री भी ड्रग तस्करी में ईडी की जांच का सामना कर रहे हैं। शिअद के विधायक सीपीएस अविनाश चंद्र जेल में बंद भोला के साथी गाबा से लेनदेन में जांच का सामना कर रहे हैं। राजा कंदोला को सिंथेटिक ड्रग कारोबार में पकड़ा गया तो आईजी उमरानंगल का नाम आया था, वह राजा के फार्म हाउस पर अकसर आते जाते थे।

लंबा पिंड चौक के पास का इलाका भी नशे की चपेट में लंबा पिंड चौक के पास इलाके में नशे की वजह से कई घरों में मातम छा चुका है। यहां के कई युवा चिट्टे का शिकार हो चुके हैं। इलाके के पास काजी मंडी है, जो नशे के कारण बदनाम है। एक 13 साल का बच्चा बीते दिनों नशा छुड़ाओ केंद्र में भर्ती हुआ। पंजाब में नशा करने वालों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। बोलस्टर नशा छुड़ाओ केंद्र के मंजोत सिंह का कहना है कि हमारे यहां पर 50 बेड की क्षमता है। एक भी बेड अभी खाली नहीं है।  

जालंधर में 5116 लोग नशा मुक्ति केंद्र में भर्ती जालंधर में अब तक नशे से ग्रस्त 5116 लोग इलाज के लिए नशा मुक्ति केंद्र में भर्ती कराए गए हैं। जालंधर में साल 2012 में 2302, 2013 में 2522 और 2014 में 3868 लोगों का नशा मुक्ति केंद्रों में इलाज किया गया था। नशाग्रस्त लोगों का इलाज करने वाले डॉक्टर निर्दोष गोयल ने बताया कि इन लोगों में से 50 फीसदी नौजवान हेरोइन का नशा करने वाले हैं। उन्होंने बताया कि यह नशीला पदार्थ इन  लोगों को बड़ी आसानी से मिल जाता है। नशा ग्रस्त लोगों का इलाज करने में काफी समस्याओं का सामना करना पड़ता है, क्योंकि नशे के आदी लोगों को काला पीलिया की शिकायत भी आम बात है।

नशे के लिए सुई का प्रयोग करने के कारण ज्यादातर मरीज एचआईवी पॉजिटिव होते हैं। अमृतसर के तरनतारन के ग्रामीण क्षेत्र नशे से सर्वाधिक प्रभावित इलाके हैं। मालवा क्षेत्र के 66 फीसदी लोग नशे के आदी हैं। इस साल अब तक कपूरथला में 233 और जालंधर में 347 मामले (एनडीपीएस) कानून के तहत दर्ज हुए हैं। पंजाब की अंतरराष्ट्रीय सीमाओं से सीमा सुरक्षा बल रोजाना बड़ी मात्रा में हेरोइन बरामद करते हैं। बीते साल पंजाब के विभिन्न सीमा क्षेत्रों से 345 किलो से ज्यादा हेरोइन जब्त की गई है। वहीं 2014 में 361 किलो और साल 2013 में 321 किलो हेरोइन जब्त की गई थी।  रिपोर्ट: सुरिंदर पाल, जालंधर
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