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रिपोर्ट: पीजीआई में एंबुलेंस व सुरक्षाकर्मियों की सीटियों से जबरदस्त शोर

Thu, 23 Jun 2016 01:52 AM IST
आशीष वर्मा/अमर उजाला, चंडीगढ़
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पीजीआई चंडीगढ़
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स्टडी में खुलासा, पीजीआई में एंबुलेंस व सुरक्षाकर्मियों की सीटियों से जबरदस्त शोर। साइलेंट जोन की कैटेगिरी में आने वाले पीजीआई में काफी शोरगुल है। साइलेंट जोन में दिन के समय 50 डेसीबल और रात के समय 40 डेसीबल शोर की अनुमति है, लेकिन पीजीआई के अंदर इससे कहीं ज्यादा ध्वनि प्रदूषण दर्ज किया गया है। पीजीआई के स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ ने अपनी एक स्टडी में पाया है कि टर्शरी स्तर के इस अस्पताल में दिन के समय में 57 से लेकर 104 डेसीबल तक शोर दर्ज किया गया है।
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 सबसे ज्यादा शोर एंबुलेंस का है, उसके बाद सिक्योरिटी गार्ड की सीटियों का। ट्रैफिक कंट्रोल करने के लिए सिक्योरिटी गार्ड्स सीटियों का इस्तेमाल करते हैं। सबसे कम शोर पीजीआई के सबस्टेशन में लगे ट्रांसफार्मर का है, लेकिन यह भी तय सीमा से ज्यादा है। स्टडी में स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ के डॉ. रविंद्रा खैवाल, तनबीर सिंह, पीयू के इन्वायरमेंट स्टडीज के सुमन मोर, ओटोलेरिंटोलाजी डिपार्टमेंट के संजय मुंजाल व नरेश पांडा सहित कई अन्य शामिल रहे।

किससे कितना शोर-गुल
शोर का स्रोत                           कितना शोर
ईसीजी मशीन                           74.66
सफाई वाली छोटी मशीन               68-70
सफाई वाली बड़ी मशीन                78-80
सिक्योरिटी गार्ड की सीटी              92
इमरजेंसी में बातचीत                   73-75
कार                                    65-67
बुलेट मोटरसाइकिल                    78-80
बस                                    80-82
ऑटो रिक्शा                            70-72
सायरन के साथ छोटी एंबुलेंस           104
सायरन के साथ बड़ी एंबुलेंस            87
कार का हॉर्न                            85-87
बस का हॉर्न                             90-92
ट्राली                                    70
लांड्री मशीन                             78-80
इनसिनरेटर                              81-82
कोल्ड फ्रीजर                           58
मोबाइल की घंटी                        64-65
टेलीफोन की घंटी                       80-82
लैब इक्विपमेंट़्स                        72-75
चिलर मशीन                            80.5
कंस्ट्रक्शन कटर                       81
इमरजेंसी में भीड़ के दौरान            72-75
एसी फैन                              75

कहां पर कितना शोर
स्थान                   दिन म (डेसी. में)         रात में
इमरजेंसी                70 से ऊपर              70 से कम 65 से ज्यादा
कार्डियक सेंटर          60 से ऊपर                60 से ज्यादा
लाइब्रेरी                 50 से ऊपर                45 से ज्यादा 50 से कम
कैफेटेरिया              70 से ऊपर                60 से ऊपर 
वर्किंग ओपीडी डे      60 से ऊपर                60 से कम
पीजीआई मुख्य गेट     70                         60 से कम
रिसर्च ब्लॉक ए         60 से ऊपर                60 से कम
एपीसी                  60 से ऊपर                60 से कम
टीचर फ्लैट             60                         50 से कम
न्यू ओपीडी गेट         70                         50 से ज्यादा
ओपीडी गेट के बाहर   70 से ऊपर                60 से ऊपर 
मुख्य गेट के बाहर      70 से ऊपर                60

शोर से बढ़ रही चिड़चिड़ाहट
स्टडी के दौरान लोगों से पूछा गया कि उन्हें शोर से क्या दिक्कतें हो रहीं हैं, तो 73.7 प्रतिशत लोगों ने बताया कि उन्हें चिड़चिड़ाहट होती है। 40.4 प्रतिशत लोगों ने बताया कि उन्हें सिरदर्द होता है। 29.3 प्रतिशत लोग सो नहीं पाते। 12.1 प्रतिशत लोगों को कोई परेशानी नहीं है। 8.1 प्रतिशत लोग हाइपरटेंशन से पीड़ित हो जाते हैं।
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इन जगहों पर सबसे कम शोर
स्टडी के दौरान सामने आया है कि पीजीआई में सबसे कम शोर वाली जगह लाइब्रेरी है। दिन के समय यहां पर करीब 50 डेसीबल का शोर रहता है। ओपीडी हॉलीडे, स्कूल, रेजिडेंशियल एरिया व नर्सिंग इंस्टीट्यूट में काफी कम शोरगुल रहता है। ऐसा देखा गया है कि यहां पर इंस्टीट्यूट की अन्य बिल्डिंग के मुकाबले लोगों का आना-जाना काफी कम है, इसलिए ध्वनि प्रदूषण काफी कम है, जबकि जिन जगहों पर ज्यादा शोर दर्ज किया गया है, वहां पर लोगों की भीड़ ज्यादा है।
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