पीजीआई चंडीगढ़ की न्यू ओपीडी में भीड़ को नियंत्रित करने के लिए गठित कमेटी ने अपनी रिपोर्ट संस्थान को सौंप दी है। कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में 15 बिंदु सुझाए हैं। कमेटी का दावा है कि यदि इन बिंदुओं पर काम किया गया तो काफी हद तक मरीजों की भीड़ को कंट्रोल किया जा सकता है। इनमें प्रमुख रूप से ओपीडी में एक पेशेंट के साथ सिर्फ एक अटेंडेंट के होने, डाक्टर के रूम के सामने मरीजों की भीड़ नहीं लगाने का सुझाव है।
साथ ही कॉरिडोर के खाली होने और डिस्पले बोर्ड लगे होने के साथ सिक्योरिटी गार्ड की संख्या भी बढ़ाने का सुझाव दिया गया है। पीजीआई प्रशासन ने न्यू ओपीडी में भीड़ को कंट्रोल करने और टोकन सिस्टम को लागू करने संबंधी एक कमेटी बनाई थी। इसमें कई डिपार्टमेंट के प्रोफेसर और हास्पिटल एडमिनिस्ट्रेशन के अधिकारी मौजूद थे।
कमेटी सभी ओपीडी में टोकन सिस्टम के पक्ष में नहीं
कमेटी न्यू ओपीडी के सभी डिपार्टमेंट में टोकन सिस्टम को लागू करने के पक्ष में नहीं है। कमेटी का तर्क है कि हर डिपार्टमेंट में टोकन सिस्टम सक्सेसफुल नहीं हो सकता, क्योंकि कुछ रूम में हर दिन ओपीडी बदलती है। हालांकि पीजीआई प्रशासन की ओर से ओपीडी में लगाए जाने वाले टोकन सिस्टम पर कमेटी की राय थोड़ी जुदा है। कमेटी का कहना है कि टोकन सिस्टम को यूनिफार्म पॉलिसी नहीं बना सकते।
कुछ डिपार्टमेंट में तो ये सक्सेसफुल है, मगर यह कहा जाए कि सभी के लिए उपयुक्त होगा तो ऐसा नहीं है। ऐसे में अब पीजीआई प्रशासन पर निर्भर करता है कि वह टोकन सिस्टम को लागू करे या कमेटी की ओर से दिए गए बिंदुओं को। टोकन सिस्टम के लिए स्टेंडिंग फाइनेंस कमेटी की ओर से करीब तीन करोड़ रुपये भी पास हो चुके हैं। ट्रायल के तौर पर स्किन और ब्लड कलेक्शन सेंटर में टोकन सिस्टम चल रहा है, जो काफी अच्छी तरह से मैनेज हो रहा है।
ये हैं कमेटी के मुख्य बिंदु
-तीन स्तर पर मरीज का वेंटिंग एरिया बनाया जाए। पहला ओपीडी के बाहर, दूसरा ओपीडी के अंदर और तीसरा डाक्टर रूम के बाहर।
-सिक्योरिटी गार्ड की संख्या बढ़ाई जानी चाहिए
- कॉरिडोर खाली होने चाहिए। डाक्टरों के रूम के सामने भीड़ नहीं होनी चाहिए।
- जिन मरीजों को इलाज की स्पेशल जरूरत हो, जैसे व्हीलचेयर, हैंडिकैप व स्टाफ मेंबर। उनकी अलग लाइन हो।
- सभी टेस्ट के लिए सिर्फ एक फार्म होना चाहिए।
- एक मरीज के साथ एक अटेंडेंट हो।
- फिजियोथैरेपी और कैंटीन को शिफ्ट करना होगा। इस जगह को वेंटिंग एरिया में बदलना चाहिए।
- टोकन सिस्टम को यूनिफार्म पालिसी नहीं बना सकते। जहां पर सक्सेस हो, वहां बना सकते हैं।
- डाक्टरों की संख्या के मुकाबले पेशेंट की संख्या भी निर्धारित हो। खासकर नए पेशेंट की संख्या तय होनी चाहिए।
- प्री अप्वाइंटमेंट सिस्टम को बढ़ावा देना चाहिए।
इसलिए जरूरी है भीड़ कंट्रोल करना
पीजीआई की ओपीडी में रोजाना दस से 12 हजार मरीज आते हैं। इतने ही मरीज के साथ तीमारदार होते हैं। डाक्टरों और स्टाफ की संख्या मिला दी जाए तो ओपीडी में नौ से एक बजे तक 25 हजार ज्यादा लोग होते हैं। ऐसे में कुछ ओपीडी में पैर रखने तक की जगह नहीं होती। सांस लेने में दिक्कत आती है। कई मरीजों को पता ही नहीं चलता है कि उनका कार्ड कहां गया। जो सुबह आते हैं तो उनका नंबर दोपहर में आता है। जो बाद में आता है तो उनका नंबर पहले। ऐसे में भीड़ को कंट्रोल करने के लिए एक बेहतर मैनेजमेंट सिस्टम की जरूरत है।