उन्होंने कहा कि हर दस दिन के बाद उन्हें पौधों के पीले पत्ते तोड़ने पड़ते हैं। पीले पत्तों को एक कंटेनर में डालकर उनसे वह खाद तैयार करती हैं। उन्होंने बताया कि हमेशा सुखी खाद ही पौधों में डालनी चाहिए।
इससे काफी हद तक कीड़ा लगने का खतरा कम हो जाता है। इसके अलावा कीड़ा लगने की स्थिति में समय पर दवाई का छिड़काव करना बहुत आवश्यक है।
रोजाना गार्डन में बैठकर पति के साथ लेती हैं चाय की चुस्की
रेनु अरोड़ा का कहना है कि जिस प्रकार इंसान को कम या ज्यादा खाना खाने से नुकसान होता है उसी प्रकार पौधों को कम ज्यादा पानी और खाद से नुकसान होता है। बच्चों की तरह उनका ख्याल रखना पड़ता है।
उन्होंने कहा कि जब लोग आकर उनके गार्डन की तारीफ करते हैं तो उन्हें खुद पर गर्व महसूस होता है। कई लोग उनसे पौधे लेकर भी जाते हैं। वह रोजाना सुबह शाम पति के साथ गार्डन में बैठकर ही चाय पीती हैं। हरियाली को देखकर उन्हें अलग ही सुकून मिलता है। आज वह केवल अपने पति के साथ घर में रहती हैं लेकिन जब भी वह बाहर जाती हैं, उन्हें यह महसूस होता है कि घर पर पीछे उनका बगीचा अकेला है।
उन्होंने बताया कि उनके बच्चे शादी होने के बाद विदेश में बस गए। इसके बाद उन्होंने बगीचे को अपने बच्चों की तरह प्यार देना शुरू किया। उन्होंने बगीचे को ही अपना परिवार बना लिया। उन्होंने बताया कि जब भी वह विदेश अपने बच्चों से मिलने जाती हैं तो तीन बार माली को वीडियो कॉल कर अपने बगीचे को देखती हैं। उनके पति ने बताया कि लोगों को सुबह उठकर अपनी नौकरी पर जाने की चिंता होती है लेकिन रेनु को उठकर केवल अपने बगीचे की चिंता होती हैं। बगीचे में सब्जियां भी लगी हैं।
बागवानी के लिए यह बातें जरूरी
- बागवानी करने के लिए सबसे पहले उसका शौक होना जरूरी है।
- पौधों के बारे में थोड़ी जानकारी होनी चाहिए।
- एक इंसान की तरह उन्हें अहमियत देनी चाहिए।
- बागवानी के लिए घर में जगह का होना जरूरी है।
- पौधों को समय पर खाद और पानी देना चाहिए।