शास्त्रीय संगीत के लिए जैसे हर रोज रियाज जरूरी होता है। इसी तरह से राइटिंग के लिए हर रोज कुछ न कुछ लिखना चाहिए। लेखन एक जुनून है, प्रतिबद्धता है। इसलिए अपने जीवन के रोज के अनुभवों को डायरी में लिखना चाहिए। ये विचार व्यक्त किए प्रसिद्घ लेखिका और कॉलमनिस्ट शोभा डे ने।
उन्होंने रविवार को सीआईआई चंडीगढ़ हेडक्वार्टर सेक्टर-31 में युवा लेखक अर्णव सिबल की किताब ‘वाइल्डफ्लावर सी’ का विमोचन किया। अर्णव ने इस किताब में अपने अनुभव और जीवन यात्रा का वृत्तांत लिखा है।
बुक लॉन्च के अवसर पर शोभा डे ने कहा कि किताब पढ़ने के बाद उन्हें लगा ही नहीं कि ये किसी 17 साल के युवा ने लिखी है। उन्हें लगा जैसे ये किसी 35 से 70 साल के लेखक ने लिखी हो। किताब किसी भी नजर से एक युवा के दृष्टिकोण से लिखी हुई नहीं लगती। इसमें फर्स्ट किस के अनुभव और भाव को बहुत ही अद्भुत तरीके से पेश किया गया है।
लाइब्रेरियन को समर्पित की बुक
अर्णव ने बताया कि उन्होंने अध्यापक, परिजन और अन्य लोगों से बहुत कुछ सीखा है। उन्होंने जो कुछ सीखा, उसी को अपनी किताब में बयां किया है। ‘वाइल्डफ्लावर सी’ उनके विचारों का कॉम्बिनेशन है। यह किताब इंटरनेशनल स्कूल ऑफ ब्रूसल्स में ऑथर्स लाइब्रेरियन जेफरी ब्रेवेस्टर को समर्पित है। युवा लेखक ने बताया कि जेफरी ब्रेवेस्टर की वजह से ही वह किताबों से परिचित हुए। उन्होंने कहा कि इस किताब से होने वाली आय सामाजिक संस्था ‘अक्षरा’ को दी जाएगी।
किताब में हैं छोटी-छोटी कहानियां
बुक में कविता, पेंटिंग और उनका ऑब्जर्वेशन है। इसके अलावा इसमें छोटी कहानियां हैं। अर्णव ने अपने दादा की वेंटिलेटर की स्थिति को भी बताया है। इसके साथ ही उन्होंने उनकी आंटी के वॉशरूम की सजावट का वर्णन भी किया है।