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अलविदा जनरल रोड्रिग्स: एट होम कार्यक्रम में लेबर कालोनियों से भी लोगों को बुलाते थे चंडीगढ़ के पूर्व प्रशासक, हर फैसला होता था स्पष्ट

Sat, 05 Mar 2022 09:56 AM IST
निवेदिता वर्मा रिशु राज सिंह, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

रिटायर्ड जनरल एसएफ रोड्रिग्स ने अधिकारियों की एक टीम बनाई हुई थी, जिसे रोजाना सुबह 9 बजे राजभवन में रिपोर्ट करना होता था। वह सभी के साथ बैठक करते थे और पूरे दिन का एजेंडा तय होता था। अधिकारी उनकी इस आदत से बहुत प्रभावित थे।
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अधिकारियों के साथ चर्चा करते जनरल रोड्रिग्स (दाएं) - फोटो : फाइल
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विस्तार
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चंडीगढ़ के पूर्व प्रशासक रिटायर्ड जनरल एसएफ रोड्रिग्स के कार्यकाल में राजभवन में होने वाले एट होम कार्यक्रम में सिर्फ पंजाब-हरियाणा व चंडीगढ़ के नामी लोगों को ही नहीं, लेबर कालोनियों में रहने वाले गरीबों को भी बुलाया जाता था। वह बड़ी आत्मीयता के साथ उनसे मिलते थे। राज्यपाल होने के बावजूद वह यूटी सचिवालय में आम लोगों की फरियाद सुनते थे। साथ काम करने वाले अधिकारी उन्हें आज भी याद करते हैं।

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रोड्रिग्स के कार्यकाल के दौरान प्रशासन में गृह सचिव रहे कृष्ण मोहन (2004-2008) ने बताया कि उनमें काम करने का जबरदस्त जज्बा था। अपने फैसलों से उन्होंने न केवल अधिकारियों बल्कि आम जनमानस के दिलोदिमाग पर छाप छोड़ी। उनके फैसले पूरी तरह स्पष्ट होते थे। कभी भी उन्होंने अपने आदेशों को घुमा फिरा कर नहीं लिखा। कई बार वो अधिकारियों को गाड़ी में बैठाकर शहर के दौरे पर निकल जाते थे। लेबर कालोनियों में रह रहे लोगों के लिए विकास के कई काम शुरू करवाए।

कई विकास योजनाएं उनके समय में शुरू हुईं। जो भी योजना शुरू करते थे, उसकी समीक्षा हमेशा करते थे। लोगों की शिकायतें सुनने की भी उनकी रोजाना की आदत थी। यही वजह है कि वह अपने ज्यादातर समय यूटी सचिवालय में ही बैठते थे। वह अफसरों व कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय करते थे। चाहे मंत्रालय में बात करनी हो, पीएमओ में या गरीब तबके के किसी इंसान से, उनका अंदाज बेमिसाल होता था। 

रोजाना सुबह 9 बजे अफसरों को बुलाते थे, फिर तय होता था दिन का एजेंडा

कृष्ण मोहन ने बताया कि उन्होंने अधिकारियों की एक टीम बनाई हुई थी, जिसे रोजाना सुबह 9 बजे राजभवन में रिपोर्ट करना होता था। वह सभी के साथ बैठक करते थे और पूरे दिन का एजेंडा तय होता था। अधिकारी उनकी इस आदत से बहुत प्रभावित थे। वह न केवल अपने अफसरों व कर्मचारियों को प्रोत्साहित करते थे, बल्कि उनमें छोटे बड़े का भेद भी नहीं करते थे। चाहे अफसर हरियाणा का हो या पंजाब का या फिर यूटी कैडर का, उसे कभी भेदभाव महसूस नहीं हुआ। चूंकि वह सेनाध्यक्ष रहे थे, लिहाजा वह जबरदस्त वक्ता भी थे।

अंग्रेजी में 26 में अक्षर होते हैं, हर लेटर से एक विभाग बनाया

कृष्ण मोहन के मुताबिक अंग्रेजी की वर्णमाला ए से जेड तक रहती है। ए से एग्रीकल्चर, ई से एजूकेशन, एच से हेल्थ, एफ से फॉरेस्ट, डब्ल्यू से वुमन तक उन्होंने हर अक्षर से विभाग बनाया और उसके लिए प्लान तैयार किया। यूटी गेस्ट हाउस का नया विंग भी उन्हीं की देन थी। सिटको के होटल माउंट व्यू को री-स्ट्रक्चर करने का भी उन्हीं का प्लान था। उन्होंने शिक्षा, स्वास्थ्य, वन, आईटी सेक्टर, सड़कों के चौड़ीकरण, महिलाओं की स्किल अपग्रेडेशन, नए पार्कों को बनाने, हरियाली को बढ़ाने को लेकर एनवायरमेंट फ्रेंडली फैसले लिए। आईटी सेक्टर को चंडीगढ़ में जबरदस्त प्रमोट किया। चंडीगढ़ की नई एक्साइज पॉलिसी भी उन्हीं के समय में बनी। 200 से 250 योजनाओं का खाका उन्होंने अपने समय में तैयार किया जिस पर पूरी तरह से अमल भी किया।

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