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पति के साथ मिलकर खत्म कर दी थी पूरी फैमिली, एक साथ 8 हत्याएं, और अब कर दिया जेल में कांड

Thu, 25 Oct 2018 05:00 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कुरुक्षेत्र(हरियाणा)
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रेलूराम के परिवार को खत्म करने वाले हत्यारे
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पति के साथ मिलकर अपने ही मां-बाप, भाई और बच्चों समेत 8 लोगों की हत्या कर दी थी। अब उसी बेटी ने जेल में ऐसा कांड कर दिया, कि पुलिस वाले चौंक गए। दरअसल, अपने ही 8 परिजनों की हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा भुगत रही हिसार के पूर्व विधायक रेलू राम पुनिया की बेटी सोनिया ने कुरुक्षेत्र जेल में आत्महत्या का प्रयास किया, जिसे महिला वार्डनों ने बचा लिया।
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इस घटना से जेल प्रशासन में हड़कंप मच गया। जेल प्रशासन ने अब उसे प्रशासनिक तौर पर ट्रांसफर कर करनाल जेल भेज दिया। जेल उपाधीक्षक की शिकायत पर पुलिस ने सोनिया के खिलाफ आत्महत्या के प्रयास के आरोप में मामला दर्ज कर लिया है। जानकारी के मुताबिक सोनिया व उसके पति संजीव को इसी वर्ष 19 फरवरी को फरीदाबाद जेल से कुरुक्षेत्र जेल में ट्रांसफर किया था।

जेल में बंद सोनिया ने मंगलवार को साड़ी का फंदा बना बैरक में ही पड़े एक बैंच पर चढ़कर पंखे से लटकने का प्रयास किया, जिसे वहां अन्य महिला बंदियों ने देख लिया। उन्होंने शौर मचाया तो महिला वार्डन मौके पर पहुंची और आनन-फानन में उसे बचाया गया। उसकी तत्काल ही जेल में तैनात चिकित्सक से जांच भी कराई गई।
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घटना की सूचना मिलते ही जेल अधीक्षक डॉ संजय सिंह व सेक्टर सात पुलिस चौकी इंचार्ज नफे सिंह, व शहर थाना पुलिस मौके पर पहुंची। बाद में जेल उपाधीक्षक की शिकायत पर पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है।

30 बंदी महिलाएं बोली, सोनिया करती है मारपीट

रेलूराम के परिवार को खत्म करने वाले हत्यारे
जेल अधिकारियों के अनुसार कुरुक्षेत्र जेल में जब से सोनिया को लाया गया तभी से उसकी हरकतें जेल प्रशासन को अजीब सी लगती रही। वह कभी दूसरी बंदी व कैदी महिलाओं के साथ मारपीट करती तो कभी वहां तैनात वार्डनों पर दबाव बनाने का प्रयास करती। यहां तक कि उसने पिछले माह भी महिला बंदियों के साथ मारपीट की। इस संबंध में पुलिस ने 24 सितंबर को उसके खिलाफ भांदस धारा 323, 324 के तहत मामला भी दर्ज किया था।

पेरोल पर गया सोनिया का पति संजीव भी फरार, छापेमारी कर रही पुलिस
हत्याकांड को अंजाम देने में सोनिया के साथ शामिल रहे उसका पति संजीव भी कुरुक्षेत्र जेल में ही शिफ्ट किया गया था और वह भी जेल प्रशासन के लिए परेशानी का सबब बना हुआ है। करीब तीन माह पहले वह पेरोल पर जेल से बाहर गया था, जो आज तक वापस नहीं लौटा है। जेल अधीक्षक के मुताबिक उसे काबू करने के लिए दो टीमें लगातार छापेमारी कर रही है। हालांकि अभी वह हाथ नहीं आया है, लेकिन जल्द ही काबू कर लिया जाएगा।

सोनिया से संजीव भी पीड़ित: डॉ संजय
जेल अधीक्षक डॉ संजय सिंह का कहना है कि सोनिया जब से इस जेल में शिफ्ट की गई है तभी से ही हर समय सभी का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करने का प्रयास करती रही है। वह भी दूसरी बंदियों के साथ मारपीट व दुर्व्यवहार करने लगती तो कभी कोई ऐसी घटना को अंजाम देने का प्रयास करती। यहां तक कि यहीं जेल में बंद उसका पति संजीव भी उससे पीड़ित हो चुका था और शायद यही कारण है वह पेरोल पर जाने के बाद वापस नहीं लौटा है। सोनिया को अब करनाल शिफ्ट कर दिया है। जेल में बंद सभी 30 महिला बंदी सोनिया से परेशान होकर उससे पीछा छुड़ाना चाहती थी। उसका हर जेल में यही व्यवहार रहा है।
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आत्महत्या के प्रयास में दर्ज किया गया मामला: नफे सिंह

रेलूराम के परिवार को खत्म करने वाले हत्यारे
सेक्टर सात चौकी इंचार्ज नफे सिंह ने बताया कि जेल उपाधीक्षक की शिकायत पर सोनिया के खिलाफ आत्महत्या के प्रयास का मामला दर्ज कर लिया गया है। इससे पहले भी उसके खिलाफ महिला बंदी के साथ मारपीट का मामला दर्ज किया गया था।

2001 में दिया था 8 हत्याओं को अंजाम
सोनिया व संजीव ने वर्ष 2001 में अपने ही 8 परिजनों की हत्या की थी। परिवार के बच्चों को भी उन्होंने बेहद निदर्यता से पटक-पटक कर मार डाला था। अदालत ने उन्हें फांसी की सजा सुनाई थी। मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा और सजा बरकरार रही। इसके बाद उन्होंने राष्ट्रपति से फांसी की सजा टालने की अपील की थी तो राष्ट्रपति ने फांसी की सजा को उम्रकैद में बदल दिया था। इसके बाद वह प्रदेश की कई जेलों में रह चुके है।

ये था पूरा घटनाक्रम
सोनिया और संजीव ने 23 अगस्त, 2001 अपने परिवार के सदस्यों को निर्ममता से मौत के घाट उतार दिया था। इस प्रकरण में पति पत्नी के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था। जिला अदालत ने 31 मई, 2004 को दोनों को फांसी की सजा सुनाई थी। इसके पश्चात 12 अप्रैल, 2005 को हाईकोर्ट ने फांसी की सजा को उम्रकैद में बदल दिया था, जबकि 15 फरवरी, 2007 को सुप्रीम कोर्ट ने जिला अदालत के फैसले को बरकरार रखते हुए दोनों को फांसी की सजा सुनाई थी।

23 अगस्त, 2008 को सुप्रीम कोर्ट ने रिव्यू पिटीशन खारिज कर दी थी। 1 सितंबर, 2007 को फांसी की तारीख तय करने के लिए जिला अदालत में याचिका दायर की गई थी। 8 सितंबर, 2007 को फांसी देने की तारीख 26 नवंबर 2007 तय की गई। नवंबर 2007 में संजीव के परिजनों ने राष्ट्रपति से एक अपील की, जो खारिज कर दी गई थी।
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