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Chandigarh: केयू के सहायक प्रोफेसर को HC से राहत, अपील लंबित रहते सेवा में बनाए रखने का आदेश

Mon, 21 Aug 2023 07:19 PM IST
चंडीगढ़ ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

कोर्ट ने कहा था कि यदि यह मान भी लिया जाए कि याची ने कोई फ्रॉड नहीं किया है और उसका एससी प्रमाणपत्र भी अथॉरिटी ने जारी किया तो भी यह वैध नहीं हो सकता। मुस्लिम व्यक्ति को अनुसूचित जाति का प्रमाणपत्र जारी ही नहीं किया जा सकता।
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Punjab And Haryana Highcourt Chandigarh - फोटो : File Photo
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विस्तार
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पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी के सहायक प्रोफेसर को बड़ी राहत देते हुए उनकी सिंगल बेंच के फैसले के खिलाफ अपील लंबित रहते सेवा में बनाए रखने का आदेश दिया है। साथ ही खंडपीठ ने अपील पर हरियाणा सरकार व कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। मुस्लिम धर्म में अनुसूचित जाति आरक्षण को अवैध बताते हुए हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने उनकी नियुक्ति को रद्द कर दिया था। 

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याचिका दाखिल करते हुए कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी के पत्रकारिता विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर आबिद अली ने उसे बर्खास्त करने के 28 जुलाई 2017 के फैसले को चुनौती दी थी। याचिका में बताया गया कि उसे 2 जुलाई 2007 को नियुक्ति दी गई थी। 2012 में कृष्ण कुमार ने यूनिवर्सिटी को शिकायत दी थी जिसके आधार पर जांच आरंभ हुई। 

जांच के दौरान करनाल के डीसी ने जांच में पाया कि जो एससी सर्टिफिकेट याची ने नियुक्ति के लिए आवेदन करते हुए दिया था वह उनके पास पंजीकृत नहीं है। इसके बाद यूनिवर्सिटी ने जांच कमेटी बनाई और याची को बर्खास्त करने का आदेश जारी कर दिया। हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने सभी पक्षों को सुनने के बाद कहा था कि याची ने आवेदन पत्र में अपनी जाति एससी ए दर्ज की थी। इंटरव्यू के समय भी जो सूची तैयार हुई थी उसमें याची को एससी उम्मीदवार दिखाया गया था। ऐसे में याची इस बात से मुकर नहीं सकता कि उसने एससी श्रेणी में आवेदन किया।
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कोर्ट ने कहा था कि यदि यह मान भी लिया जाए कि याची ने कोई फ्रॉड नहीं किया है और उसका एससी प्रमाणपत्र भी अथॉरिटी ने जारी किया तो भी यह वैध नहीं हो सकता। मुस्लिम व्यक्ति को अनुसूचित जाति का प्रमाणपत्र जारी ही नहीं किया जा सकता। ऐसे में याची की नियुक्ति सही नहीं थी और याचिकाकर्ता को सेवा में बने रहने का कोई हक नहीं है। 

कोर्ट ने याचिका को खारिज करते हुए उसे दो माह के भीतर सरकारी आवास को भी खाली करने का आदेश दिया था। सिंगल बेंच के फैसले को अब उन्होंने खंडपीठ के समक्ष चुनौती दी है जिस पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार व कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी को नोटिस जारी करते हुए जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है। 

सिंगल बेंच ने उनकी याचिका पर नोटिस जारी करते हुए उन्हें सेवा में बनाए रखने का आदेश दिया था जो याचिका खारिज होने के साथ ही रद्द हो गया था। खंडपीठ ने अब उसी अंतरिम इंतजाम को याचिका लंबित रहते जारी रखने का आदेश दिया है।

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