चंडीगढ़। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान की पत्नी गुरप्रीत कौर की ओर से पांच करोड़ रुपये की कथित रिश्वत मांग के आरोपों से जुड़े मानहानि मामले में चंडीगढ़ जिला अदालत ने पूर्व जज रणजीत सिंह को राहत दी है। सिविल जज (जूनियर डिवीजन) डॉ. परीक्षित ने 25 सितंबर को पूर्व जज के खिलाफ 8 सितंबर को जारी एकतरफा अंतरिम रोक हटा दी। अदालत ने माना कि रणजीत सिंह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में आरोपों को अपनी व्यक्तिगत जानकारी के तौर पर नहीं बल्कि हाईकोर्ट में चल रही कार्यवाही के संदर्भ में रखा था।
अदालत ने कहा कि गुरप्रीत कौर ने अंतरिम राहत लेते समय पूरी प्रेस कॉन्फ्रेंस और हाईकोर्ट के आदेश का खुलासा नहीं किया था, जिसमें पांच करोड़ रुपये की कथित मांग से जुड़े आरोपों का उल्लेख था। अदालत के अनुसार, यह महत्वपूर्ण तथ्य था।
हाईकोर्ट में पहले ही उठ चुका था आरोप
मामला अमृतसर के सिविल लाइंस थाने में दर्ज एफआईआर नंबर 77 से जुड़ा है। इस मामले में हाईकोर्ट में दाखिल याचिका में मुख्यमंत्री की पत्नी से संबंधित कथित हस्तक्षेप और एफआईआर रद्द कराने के लिए चार-पांच करोड़ रुपये की कथित मांग के आरोप लगाए गए थे। हाईकोर्ट ने उस समय इन आरोपों की सत्यता पर कोई निष्कर्ष नहीं दिया था।
पूरी प्रेस कॉन्फ्रेंस देखने के बाद बदला रुख
8 सितंबर को अदालत ने रणजीत सिंह समेत अन्य प्रतिवादियों को पांच करोड़ रुपये की कथित मांग से संबंधित अपुष्ट मानहानिकारक सामग्री प्रकाशित या प्रसारित करने से रोका था। बाद में रणजीत सिंह ने पूरी प्रेस कॉन्फ्रेंस का वीडियो और हाईकोर्ट का आदेश पेश कर रोक हटाने की मांग की। अदालत ने वीडियो देखने के बाद माना कि उन्होंने हाईकोर्ट की कार्यवाही में उठे आरोपों का संदर्भ दिया था। अदालत ने रणजीत सिंह के खिलाफ अंतरिम रोक हटाते हुए संभावित मुआवजे के लिए अलग कार्रवाई की स्वतंत्रता भी दी। मामले की अगली सुनवाई 6 अक्तूबर को होगी।