पाक सेना प्रमुख जनरल कमर जावेद बाजवा से गले मिलने पर सिद्धू के खिलाफ लोगों का गुस्सा थम नहीं रहा है। गले मिलने से आहत शहीदों के परिजनों ने सरकार से सम्मान वापस लेने की पेशकश की है। पंजाब के गुरदासपुर में शहीदों के परिजनों ने एक बैठक का आयोजन किया। इस घटना का कड़ा संज्ञान लेते हुए शहीदों के परिवारों ने बैठक कर अपना गुस्सा जाहिर किया।
बैठक में सीआरपीएफ की 182 बटालियन के शहीद कांस्टेबल मनदीप कुमार की माता कुंती देवी व पिता नानक चंद ने नम आंखों से बताया कि उनके बेटे ने तीन महीने पहले जम्मू-कश्मीर के पुलवामा सेक्टर में पाक प्रशिक्षित आतंकियों से लड़ते हुए अपनी शहादत दी थी। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता दिवस के मौके पर बतौर मुख्य मेहमान गुरदासपुर पहुंचे कैबिनेट मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू ने उन्हें दोशाला ओढ़ाया तो उसमें उन्हें अपने बेटे की शहादत की गर्माहट व गौरव महसूस हुआ।
मगर उस दिन जिन हाथों से सिद्धू ने उन्हें यह सम्मान दिया, आज उन्हीं हाथों से पाक सेना के जनरल को गले मिलने पर सिद्धू द्वारा दिया गया यह सम्मान उन्हें कांटों की तरह चुभ रहा है। इस लिए वह चाहती हैं कि सरकार उनसे यह सम्मान वापस ले ले।
शहीदों के परिजनों ने कहा कि सिद्धू ने पाक सेना प्रमुख को जफ्फी डालकर उनके जख्मों पर नमक छिड़कने का काम किया है। शहीद परिवारों ने एकसुर में आवाज बुलंद करते हुए कहा कि उन्हें सिद्धू के पाक जाने पर कोई आपत्ति नहीं है, मगर उस जनरल बाजवा से गले मिलने पर एतराज है। उन्होंने कहा कि क्या सिद्धू भूल गए हैं कि यह वही आर्मी चीफ है, जिसके आदेश पर पाक सेना आए दिन भारतीय सीमा पर हमारे जवानों और सीमा पर बसे लोगों पर गोलाबारी करती है।
शहीदों के परिजन बोले कि ऐसा करने से पहले सिद्धू ने एक बार यह नहीं सोचा कि हमारे बच्चों के हत्यारे जनरल से गले मिलने पर शहीद परिवारों पर क्या बीतेगी। उन्होंने कहा कि इस सारे घटनाक्रम को लेकर जहां उनकी भावनाओं को ठेस पहुंची है, वहीं देश के सभी शहीदों का अपमान हुआ है।
सीमा प्रहरियों के मनोबल को पहुंची ठेस : कुंवर विक्की
शहीद परिवारों की बैठक में विशेष तौर पर पहुंचे शहीद सैनिक परिवार सुरक्षा परिषद के महासचिव कुंवर रविंदर सिंह विक्की ने कहा कि पूरा विश्व जानता है कि पाकिस्तान आतंक का पोषक है। पाक सेना ही आतंकियों को शह देकर सीमा पार से घुसपैठ करवा हमारे देश में आतंक को बढ़ावा दे रही है। हिंदोस्तान में जब भी पाक की तरफ दोस्ती का हाथ बढ़ाया, उसने हमेशा ही हमारी पीठ में खंजर घोंपा है। चाहे वह कारगिल का युद्ध हो या अक्षरधाम मंदिर, संसद भवन व मुंबई पर हुआ हमला हो।
इन सभी हमलों के पीछे पाक का आतंकी चेहरा सारे विश्व के सामने बेनकाब हुआ है। उन्होंने कहा कि सिद्धू द्वारा पाक सेना प्रमुख जनरल बाजवा को गले मिलने पर जहां शहीद परिवारों की भावनाएं आहत हुई हैं, वहीं सरहद पर तैनात हमारे सीमा प्रहरियों के मनोबल को भी ठेस पहुंची है।
बैठक में हिस्सा लेने वाले शहीद परिवार
इस अवसर पर परमवीर चक्र विजेता कैप्टन गुरबचन सलारिया के भतीजे सूबेदार कर्ण सिंह, अशोक चक्र विजेता फायरमैन चमन लाल की पत्नी आशा रानी, कीर्ति चक्र विजेता नायब सूबेदार बलदेव राज की पत्नी कमला रानी, शहीद कांस्टेबल मनदीप कुमार की माता कुंती देवी व पिता नानक चंद, पठानकोट एयरबेस हमले के शहीद कैप्टन फतेह सिंह की पत्नी शोभा ठाकुर, इसी हमले के शहीद हवलदार कुलवंत सिंह के बेटे सतविंदर सिंह, शहीद सिपाही अजय सलारिया के पिता कैप्टन रछपाल सिंह, शहीद हवलदार गुरविंदर सिंह के पिता सतविंदर सिंह, शहीद सिपाही मक्खन सिंह के पिता हंसराज, शहीद सिपाही जतिंदर कुमार के पिता राजेश कुमार, शहीद सिपाही सुखदयाल सैनी की पत्नी पल्लवी सैनी, शहीद सिपाही रंधीर सिंह के पिता सुखविंदर सिंह, शहीद सिपाही अरजिंदर सिंह के पिता गुरमीत सिंह उपस्थित थे।