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पंजाब की तर्ज पर मानसून सत्र में आएगा रेगुलराईजेशन एक्ट, साठ हजार कर्मियों की बचाई जाएगी नौकरी

Fri, 20 Jul 2018 03:00 AM IST
यशपाल शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
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सांकेतिक तस्वीर
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हरियाणा की मनोहर लाल सरकार चुनाव से ठीक पहले कच्चे कर्मचारियों को लेकर मास्टर स्ट्रोक खेलने की तैयारी में है। हजारों कच्चे कर्मियों की नाराजगी सरकार किसी सूरत में मोल नहीं लेना चाहती। जिसे देखते हुए पहले सरकार हाईकोर्ट के निर्णय से सीधे तौर पर प्रभावित 4654 कर्मियों की नौकरी बचाने को अध्यादेश लाने की तैयारी में थी, लेकिन 17 अगस्त से संभावित मानसून सत्र होने पर सरकार अब पंजाब की तर्ज पर रेगुलराइजेशन एक्ट लाने की तैयारी कर रही है। पूरे मामले में उचित निर्णय लेने के लिए मुख्य सचिव डीएस ढेसी की अध्यक्षता वाली कमेटी भी इसके पक्ष में है। 
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कमेटी की दो बैठकें हो चुकी हैं और तीसरी जल्दी होने वाली है। मानसून सत्र के लिए एक महीने से भी कम समय बचा है, इसलिए सरकार अध्यादेश लाने से पीछे हट गई है। विधयेक लाकर सीधा एक्ट बनाकर प्रभावित कर्मचारियों की नौकरी तो बचाई जाएगी ही, सरकारी विभागों में कार्यरत लगभग साठ हजार कच्चे कर्मियों को नियमितीकरण का तोहफा भी मिल सकता है। चूंकि, हाईकोर्ट ने छह महीने के भीतर सभी कच्चे कर्मियों को हटाकर पक्की भर्ती करने के निर्देश दिए हैं। इतने कम समय में सरकार न तो इतनी बड़ी भर्ती कर सकती है, न ही वह हजारों कर्मियों को निकालने का रिस्क लेगी, चूंकि अगले साल होने वाले चुनावों में भाजपा की सत्ता वापसी की राह में यह रोड़ा बन सकते हैं।

इसलिए सरकार पंजाब रेगुलराइजेशन एक्ट 2016 की तर्ज पर हरियाणा में भी एक्ट बनाकर हाईकोर्ट के निर्णय कि क्रियान्वयन पर रोक लगाने की तैयारी में है। इसके बाद स्टेट ऑफ कर्नाटका बनाम ऊमा देवी के मामले में सुप्रीम कोर्ट के निर्णय को निष्प्रभावी करने के लिए कदम उठाए जाएंगे। सरकार के पास वैसे भी 28 अगस्त तक का समय है, चूंकि 90 दिन के भीतर हाईकोर्ट के निर्णय पर रोक लगाना जरूरी है। सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दायर करने को लेकर सरकार के विधि परामर्शी पहले ही इंकार कर चुके हैं। 
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एक्ट बनाने से ही बचेगी नौकरी : लांबा 

सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा के महासचिव सुभाष लांबा ने कहा कि सरकार के पास एक्ट बनाकर ही कच्चे कर्मियों की नौकरी बचा सकती है। इतने कम समय के लिए सरकार अध्यादेश नहीं लाना चाहेगी। विपक्ष भी सरकार को इस मामले में अपना समर्थन दे चुका है।

सर्व कर्मचारी संघ के संपर्क में सीएमओ
22 जुलाई को सीएम निवास की ओर प्रभावित कर्मचारियों के प्रस्तावित कूच को टालने की कोशिशें तेज हो गई हैं। सर्व कर्मचारी संघ के नेताओं से मुख्यमंत्री कार्यालय लगातार संपर्क साधे हुए हैं। एक-दो दिन में मुख्यमंत्री मनोहर लाल या उनके प्रधान सचिव राजेश खुल्लर सर्व कर्मचारी संघ व प्रभावित कर्मचारियों के प्रतिनिधिमंडल को बुलाकर वार्ता कर सकते हैं। सरकार किसी सूरत में सीएम निवास की ओर कर्मचारियों का कूच नहीं चाह रही। वार्ता के दौरान सरकार अपने निर्णय से भी संघ नेताओं को अवगत करा देगी।
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